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नरगा लागू करानेवाले कर्मचारियों का टोटा

झारखंड में नरगा को क्रियान्वित कराने में अधिकतर जिलों में ब्लॉक स्तर पर समर्पित कर्मचारियों की भारी कमी है। जामताड़ा सहित कुछ जिलों में जिला एवं राज्य के अधिकारियों द्वारा नरेगा की योजनाओं का निरीक्षण नहीं किया गया है। 60 वर्ष से अधिक के बेरोगारों को नरगा में पंजीकृत नहीं किया गया है। राज्य में 15 प्रतिशत ही मजदूरी का भुगतान व्यक्ितगत अथवा संयुक्त खातों द्वारा किया जा रहा है, जबकि नरगा में मजदूरी का शत-प्रतिशत भुगतान बैंकों या डाकघरों में खाता खोलकर किया जाना है।ड्ढr यह बातें केंद्र सरकार की नेशनल लेबल मॉनिटर रिपोर्ट एवं एरिया ऑफिसर की रिपोर्ट में कही गयी हैं। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की सचिव रीता शर्मा ने सीएस को पत्र भेज कर स्थिति में सुधार लाने को कहा है। भारत सरकार के उक्त पत्र के आलोक में राज्य ग्रामीण विकास के सचिव एस के सत्पथी जिलों का दौरा कर नरगा योजनाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।ड्ढr रिपोर्ट के अनुसार सिमडेगा और जामताड़ा जिला में कई स्थानों पर नरगा की गाइडलाइन का उल्लंघन किया जा रहा है। मस्टर रोल भरने में गड़बड़ी की जा रही है। जामताड़ा में मजदूरों का रािस्ट्रेशन नहीं किये जाने की शिकायतें मिलीं। झारख्ांड में सोशल ऑडिट की 16 शिकायतें लंबित पड़ी हैं।ड्ढr राज्य के सभी जिलों में स्थित बैकों एवं डाकघरों में कर्मचारियों एवं आधारभूत संरचनाओं की कमी है, इस वजह से भी मजदूरी के भुगतान के लिए खाते खोलने में विलंब किया जाता है। जांच टीम ने पाया कि चतरा, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, हाारीबाग, जामताड़ा, लातेहार, पाकुड़, रांची, सरायकेला खरसावां एवं प सिंहभूम में मजदूरी का भुगतान डाकघर अथवा बैकों में खाता खोल कर किये जाने की कोई रिपोर्ट नहीं है।

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  • Web Title: नरगा लागू करानेवाले कर्मचारियों का टोटा