DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

थाईलैंड : राजनीतिक भ्रष्टाचार पर कानूनी प्रहार

यह एशिया का दुर्भाग्य है कि भारत सहित कई देशों की राजनीति में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार ने जड़ जमा ली है। जो भी व्यक्ित सत्ता में आता है, वह गलत तरीके से पैसे कमा कर वातावरण को विषाक्त कर देता है, जिसमें आम आदमी राजनीति में सिर न उठा सके। यह बात भारत की राजनीति के लिए सच है और उसके पड़ोसी देश थाईलैंड के लिए भी है। थाईलैंड भारत का एक निकटतम पड़ोसी देश है। पहले यह ‘सियाम’ था। थाईलैंड में अभी भी 0 प्रतिशत लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं और प्राय: हर छोटे-बड़े मकान के दरवाजे पर भगवान बुद्ध की मूर्ति लगी रहती है। थाईलैंड के साथ एक रोचक बात यह है कि वहां की जनता वहां के राजा ‘भूमिबोल’ को देवता की तरह पूजती है, पर पिछले कुछ वर्षो से थाईलैंड की राजनीति अत्यंत ही दूषित हो गई थी। सन् 2006 में थाईलैंड के प्रधानमंत्री थैक्िसन शिनवात्रा थे। वे आज की तारीख में एशिया के सबसे अमीर व्यापारियों में से एक हैं। पूर दक्षिण-पूर्व एशिया में टेलीकम्युनिकेशन, खासकर मोबाइल फोन में उन्होंने क्रांति ला दी, जिसके कारण उन्हें बेशुमार दौलत हाथ लग गई। परन्तु उन्होंने व उनके परिवार के सदस्यों ने दोनों हाथों से थाईलैंड की जनता को लूटा। राजनीति के एक चतुर खिलाड़ी थैक्िसन ने अनुभव से यह सीख लिया कि देश में वही व्यक्ित प्रधानमंत्री हो सकता है, जिसकी पार्टी को देश की आधी से अधिक जनता का समर्थन प्राप्त हो। थाईलैंड में भी अधिकतर लोग गांव और देहातों में रहते हैं। उनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो गरीबी में दिन बिताते हैं। थैक्िसन ने गांव में रहने वाले लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य में अनेक सुविधाएं दीं। कोई भी गरीब किसान का बेटा थाईलैंड में कहीं भी रह कर सरकारी स्कॉलरशिप से शिक्षा प्राप्त कर सकता है। गांव में रहने वाला कोई भी निर्धन व्यक्ित मात्र एक बात (थाईलैंड की मुद्रा) खर्च कर देश के महंगे से महंगे सरकारी और निजी अस्पताल में अपना और अपने परिवार के लोगों का इलाज करा सकता है। एक ‘बात’ का मूल्य एक रुपए के बराबर है। इस तरह गांव के गरीब लोगों के इलाज का सारा खर्च सरकार देती है। थैक्िसन के ऐसा करने से गांव की जनता थैक्िसन के पक्ष में हो गई और हाल के वर्षो में जब देश में चुनाव हुआ थैक्िसन भारी बहुमत से जीत गए। राजधानी बैंकाक की पढ़ी-लिखी सजग जनता थैक्िसन की चालबाजी अच्छी तरह समझती थी। थैक्िसन जनता को बेवकूफ बनाकर दोनों हाथों से देश को लूट रहे थे। बैंकाक में आए दिन प्रदर्शन होने लगे और मांग होने लगी कि थैक्िसन को प्रधानमंत्री पद से हटाया जाए। थैक्िसन ने समझ लिया कि इन परिस्थितियों में वे अधिक दिनों तक थाईलैंड में नहीं रह सकते हैं और जनता के बढ़ते हुए रोष को देखते हुए वे लंदन चले गए। इधर थाईलैंड में सैनिक विद्रोह हो गया। नई फौाी हुकूमत ने थैक्िसन की पार्टी ‘थाई रैक थाई’ को गैर कानूनी घोषित कर दिया। उसके अनेक प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, जो भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए थे। सेना ने दो वर्ष के बाद सन् 2008 के शुरू में देश में आम चुनाव कराया। थैक्िसन के समर्थकों ने ‘पीपुल्स पावर पार्टी’ (पीपीपी) नाम की पार्टी बनाई जिसमें थैक्िसन के समर्थक भर पड़े थे। चुनाव के बाद इसी पार्टी को बहुमत मिला और उसके प्रधान सेन्दरावेज देश के प्रधानमंत्री बने। वे पूरी तरह थैक्िसन के हाथ की कठपुतली थे। थैक्िसन लंदन से बैंकाक के समीप इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता आ गए और वहीं से प्रधानमंत्री सुन्दरावेज को निर्देश देते रहे। कुछ महीनों बाद सुन्दरावेज की सलाह पर थैक्िसन बैंकाक आ गए। सुन्दरावेज की सलाह पर थैक्िसन थाईलैंड तो आए। परन्तु न्यायालयों में उनके और उनके परिवार के लोगों और मित्रों के खिलाफ भ्रष्टाचार के जो लंबित मामले थे, उन्हें फिर से शुरू कर दिया। आज की तारीख में थैक्िसन के कई प्रमुख समर्थकों पर मुकदमा चल रहा है और कुछ लोगों को तो सजा भी सुना दी गई है। थाईलैंड की जनता न्यायालय के इस निष्पक्ष रवैए से अत्यंत ही संतुष्ट है और उसे लगता है कि राजा भूमिबोल ने न्यायालयों को निर्भीक होकर अपना काम करने की जो सलाह दी है, वह शतप्रतिशत सही है। देश के प्रधानमंत्री सुन्दरावेज पर एक मानहानि का मुकदमा चलाया जा रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक टेलीविजन शो में बैंकाक के डिप्टी गवर्नर के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। उन पर भ्रष्टाचार के दूसर कई मुकदमे चल रहे हैं। देश के प्रमुख समाचारपत्रों के द्वारा यह मांग हो रही है कि सुन्दरावेज अपने पद से त्यागपत्र दें। जब राजा भूमिबोल ने न्यायालयों को आश्वस्त किया कि कोई उनका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है तब न्यायालयों ने भ्रष्ट राजनेताओं पर शिकांा कसना शुरू कर दिया। आने वाले दिनों में संभव है कि थैक्िसन सहित अनेक राजनेताओं को कठोर सजा सुनाई जाए और उनके भ्रष्टाचार के कारण जगजाहिर किए जाएं। लेखक पूर्व सांसद एवं पूर्व राजदूत हैं।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: थाईलैंड : राजनीतिक भ्रष्टाचार पर कानूनी प्रहार