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करुणानिधि और बालू को चेताया

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री, परिवहन सचिव, परिवहन मंत्री और केंद्रीय परिवहन मंत्री टीआर बालू को सोमवार को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अवमानना नोटिस का जवाब नहीं दिया तो उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है। जस्टिस बीएन अग्रवाल और जीएस सिंघवी की खंडपीठ तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता द्वारा दायर अवमानना याचिका पर विचार कर रही है। यह याचिका 1 अक्तूुबर 07 को तमिलनाडु में बंद न रखने के सर्वोच्च अदालत के आदेश की अवहेलना पर दायर की गई है। बंद न रखने का आदेश कोर्ट ने 30 सितंबर को दिया था। बंद का आह्वान डीएमके और सहयोगी दलों ने विवादास्पद सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने की मांग को लेकर किया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस बीएन अग्रवाल ने कहा- आश्चर्य की बात है कि बार-बार समय लेने पर भी मुख्यमंत्री के करुणानिधि, परिवहन मंत्री, परिवहन सचिव और केंद्रीय परिवहन मंत्री टीआर बालू ने सुप्रीम कोर्ट को जवाब देना उचित नहीं समझा। क्या वे स्वयं को कानून से ऊपर समझते हैं। ये किस तरह के लोग हैं कि सब कुछ करंगे लेकिन जवाब दाखिल नहीं करंगे। बालू के वकील की ओर इशारा करते हुए जस्टिस अग्रवाल ने कहा- उनके पास समय नहीं है क्योंकि वह केंद्रीय मंत्री हैं, यहां तक कि वह सुप्रीम कोर्ट पर भी अपनी सत्ता चला रहे हैं। यदि इन लोगों का यही रवैया है तो इन सबके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर इन्हें कोर्ट में बुलवाना पड़ेगा। कोर्ट के इस रुख पर तमिलनाडु के वकील प्रगाशम ने कहा राज्य के मुख्य सचिव एलके त्रिपाठी के जवाब को मुख्यमंत्री का जवाब समझा जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह जवाब अपनाने के लिए मुख्यमंत्री को शपथपत्र देना होगा। साथ ही उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि जवाब देने में इतनी देरी क्यों हुई। खंडपीठ ने टीआर बालू को भी जवाब के साथ देरी का स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। राज्य के परिवहन मंत्री और परिवहनल सचिव को भी यही स्पटीकरण मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

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  • Web Title: करुणानिधि और बालू को चेताया