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चानसूचना अधिकारी कर रहे गलतियाँ

प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की र्ता पर सूचना के अधिकार कानून-2005 की एक मार्गदर्शिका तैयार की है। यह मार्गदर्शिका सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों को भेाी और इसका मकसद खासकर सभी विभागों केोन सूचना अधिकारियों सूचना के अधिकार कानून से अच्छी तरह से अवगत कराना है।ड्ढr मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता ने यह मार्गदर्शिका सभी अफसरों को भेाी है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि सूचना कानून आम आदमी को सांसद और विधायक के बराबर सूचना के अधिकार का दराड्ढr देता है।ड्ढr उच्च स्तरीय सूत्रों ने बताया कि मुख्य सचिव ने अफसरों से कहा है कि यह मार्गदर्शिका सूचना के अधिकार कानून के महत्वपूर्ण पहलुओं का स्पष्ट रूप से खुलासा किया गया है। इससेोनसूचना अधिकारियों को लोगों को सूचना देने में आसानी होगी तथा अपने मामलों की सूचना आयोग में प्रभावी पैरवी करने में भी सहूलियत मिलेगी। इसके अध्ययन से वे आयोग केोुर्माने से भी बच सकेंगे। क्योंकिोानकारी के अभाव में इस समय वे अपने कार्य का ठीक से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। उनकी गलतियों के कारण आयोग से उन परोुर्माना भी हो रहा है।ड्ढr प्रदेश सरकार की मार्गदर्शिका में यह स्पष्ट किया गया है कि सूचना क्या है। यानी अभिलेख, दस्तावे, ज्ञापन, ई-मेल, मत, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लागबुक, संविदा, रिपोर्ट, कागापत्र, नमूने, माडल, आँकड़ों संबंधी सामग्री सूचना में शामिल है।ड्ढr मार्गदर्शिका की खास बात यह है कि इसमें यह स्पष्ट किया गया है कि सूचना का अधिकार कानून आम आदमी को संसद सदस्यों और विधानमंडल सदस्यों के बराबर का अधिकार प्रदान करता है यानी एसी सूचनाोिसे संसद और विधानमंडल को देने से इनकार नहीं कियाोा सकता,उसे आम आदमी को भी देने से इनकार नहीं कियाोा सकता है। यह भी साफ किया गया है कि गरीबी रखा से नीचे के लोगों को मुफ्त सूचना देनी होगी।ड्ड

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