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राजद शासन काल की पुलिस अच्छी थी: हरेन्द्र

भाजपा के संगठन मंत्री हरंेद्र प्रताप को आन्दोलकारियों से बर्ताव के मामले में एनडीए सरकार के बदले राजद शासन काल की पुलिस अच्छी लगती है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में श्री प्रताप ने इसका जिक्र किया है। उनके मुताबिक लालू प्रसाद के शासनकाल में एक बार आन्दोलन के दौरान वह पुलिस की लाठी से जख्मी हो गए थे। पटना के तत्कालीन एसपी ने पहले उनका इलाज कराया। बाद में जेल भेजा। मौजूदा राज में भी विश्वविद्यालय कर्मचारियों की हड़ताल को खत्म कराने के लिए वह आमरण अनशन पर बैठे तो पुलिस उन्हें थाना में ले गई।ड्ढr ड्ढr थाना में उन्हें पानी तक के लिए नहीं पूछा गया। बड़े नेताओं की मौजूदगी में ही पुलिस अपराधियों के साथ मारपीट और गाली-गलौज करती रही। पुलिस ने किसी नेता के साथ शिष्ट आचरण का प्रदर्शन भी नहीं किया। श्री प्रताप ने अपने पत्र में लिखा है-बिहार में एक दल की नहीं, गठबंधन की सरकार है, यह पुलिस को कौन समझाएगा। श्री प्रताप ने अपने बार में लिखा है कि वह जनता के मुद्दों पर लगातार आन्दोलन करते रहे हैं। आप(नीतीश कुमार) तो 10 से 1तक जनता दल में रहे। 1में केंद्र में मंत्री बन गए। 2000 में सरकार गिरने के बाद बिहार में रह कर संघर्ष करने का दावा किया था। मगर कुछ दिन बाद ही केंद्र सरकार में शामिल हो गए। सुशील कुमार मोदी भी लोकसभा में चले गए। उन्होंने मुख्यमंत्री पर सत्ता में भागीदारी में भी भेदभाव का आरोप लगाया। श्री प्रताप ने याद दिलाया कि 2000 में भाजपा विधायकों की संख्या अधिक थी, फिर भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन, अपने दम पर सरकार बनते ही 60 और 40 का फामरूला तय कर लिया गया। पत्र में चेतावनी दी गई है कि रंग ढंग नहीं बदला तो लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में एनडीए को खामियाजा भुगतना होगा।

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