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बच्चों का भविष्य चौपट कर रहे : नीतीश

विश्वविद्यालयकर्मियों की बेमियादी हड़ताल से क्षुब्ध मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ तौर पर कहा कि राज्य के बच्चों का भविष्य बर्बाद कर देने वालों से बात नहीं करेंगे। सोमवार को जनता दरबार में संवाददाताओं से बात करते हुए श्री कुमार ने कहा कि हड़ताल के पीछे विश्वविद्यालय कैंपस के ‘वरिष्ठ नागरिकों’ का हाथ है जो विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हैं। शिक्षा में सुधार के प्रयासों पर पानी फेरने के लिए ही बच्चों के नामांकन के समय हड़ताल की गयी। पढ़ाई ठप कराकर आंदोलन करना ठीक नहीं। नामांकन के समय आंदोलन करके भयादोहन किया जा रहा है। मैं हड़तालियों की शिक्षाविरोधी कार्रवाई से न सिर्फ दुखी बल्कि मर्माहत हूं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयकर्मी न तो सरकारी कर्मचारी हैं और न ही सरकार को उनकी सीधी जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालयों का अपना कानून है और सरकार उन्हें अनुदान देती है। वर्ष 2006 से पहले विश्वविद्यालयों में शिक्षक-कर्मचारी आठ-आठ महीने तक वेतन की टकटकी लगाए रहते थे। हमने समय पर वेतन देना शुरू किया तो वे बदले में हड़ताल करके बच्चों के भविष्य का नाश कर रहे हैं। अगर वे लोग धरना करने के साथ-साथ बच्चों का नामांकन भी करते तो मैं खुद उनके पास जाकर बात करता। मानव संसाधन और वित्त विभाग विश्वविद्यालयकर्मियों की मांगों पर विचार कर रहा है। मुझे भी उनकी मांगों से एतराज नहीं है पर समाज को तय करना होगा कि पहले बच्चों की पढ़ाई जरूरी है या हड़ताल। संकट की पूरी जवाबदेही हड़तालियों की है। जब उनलोगों ने छात्रों का सवा महीना बर्बाद कर दिया तो अब अपने बार में भी सोच लें। आरोप लगाते हैं कि मुख्यमंत्री ने हड़ताल पर चुप्पी साधी। बताइए क्या करूं मैं? ढोल बजाऊं। मैं चुप नहीं दुखी हूं।

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