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समझ में आने लगा डीचाीपी का मैसेज

या कहा आपने? कुर्की-जब्ती हो गयी। यह तो अपना चेहरा बचाने की कोशिश हुई। मैंने 34 साल की नौकरी में बहुत सी कुर्की-जब्ती देखी है। मुझे समझाने की बजाय आप यह समझ लीजिए कि बच्ची 24 घंटे के भीतर बरामद होनी चाहिए। डीजीपी की हैसियत से पहली बार जनता दरबार में आए डी.एन.गौतम ने सोमवार को वैशाली की शबनम कुमारी के अपहरण मामले में एसपी की जमकर खिंचाई की। उन्होंने पूर्वी चम्पारण के एसपी को पीड़ितों के साथ न्याय करने की सलाह दी। वैसे पुलिस कप्तानों को भी नये डीजीपी का मैसेज समझ में आने लगा है। शायद तभी फोन पर आदेश मिलते ही जहानाबाद के एसपी ने एफआईआर दर्ज नहीं कर रहे दारोगा को सस्पेंड कर दिया।ड्ढr ड्ढr मखदुमपुर स्थित छरियारी गांव के महेन्द्र सिंह की पत्नी का अपहरण हो गया लेकिन थाना में प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हो पायी। डीजीपी ने जहानाबाद एसपी को निर्देश दिया-एफआईआर दर्ज कराकर दारोगा पर विभागीय कार्रवाई शुरू कीजिए। याद रहे कार्रवाई अनंत काल तक नहीं चलेगी। मुझे तीन माह में ही रिपोर्ट चाहिए। इसी तरह पूर्व मुखिया रामसंजीव राय के आठ वर्षीय बेटे के अपहरण और हत्या के मामले में डीजीपी सीतामढ़ी के एसपी से बोले- काम हो जाना चाहिए। ध्यान रहे कि इन्हें फिर मेर पास नहीं आना पड़े। एसपी से बात करने के बाद उन्होंने शिकायतकत्त्रा को दफ्तर का फोन नंबर देकर कहा-सात दिन में एक्शन नहीं हुआ तो मुझे बताइएगा, बाकि हम देख लेंगे।ड्ढr ड्ढr बाबरीनाजिर गांव में पूर्व मुखिया रामचन्द्र प्रसाद के घर छापामारी करने गयी पुलिस ने 13 साल की बच्ची मिन्नी को गोली मार दी। यही नहीं दारोगा रामपुकार सिंह ने पीड़ितों पर ही एफआईआर कर दिया। गिरफ्तारी के डर से पूर्व मुखिया का पूरा परिवार भागकर जनता दरबार में आ गया। बच्ची के शरीर पर गोली का निशान देखने के बाद डीजीपी पूर्वी चम्पारण के एसपी से बोले-साफ लगता है कि पीड़ितों के साथ ज्यादती हुई है। अब आप किसी न्यायप्रिय अधिकारी से जांच कराइए। और हां! जांच पूरी होने तक किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी।

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