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नहीं मिली निकेता को गर्भपात की इचााजत मुंबई।

मुंबई हाईकोर्ट ने अंतत: निकेता को गर्भपात की क्षाजत नहीं दी। कोर्ट ने कहा कि डाक्टरों की कोई रिपोर्ट गर्भपात की अनुशंसा नहीं करती। निकिता ने भारतीय गर्भपात कानून को कोर्ट में इस आधार पर चुनौती दी थी अगर पैदा होने वाला बच्चा अपंग हो तो क्या 20 हफ्ते की बंदिश में ढील दी जा सकती है।ड्ढr कानूनी प्रावधान के मुताबिक भारत में 20 हफ्ते के गर्भधारण के बाद गर्भपात नहीं किया जा सकता। निकेता के गर्भ को 24 हफ्ते से ज्यादा हो चुके हैं। डाक्टरी जांच में यह पता चला कि उसके होने वाले बच्चे के दिल में रुकावट है। बिना पेसमेकर के वह नहीं रह सकेगा। बच्चे के कष्टमय भविष्य को देखते हुए निकेता और उसके पति हरश मेहता चाहते थे कि वह इस दुनिया में आये ही नहीं। न्यायमूर्ति जेएन पटेल और और केए तादेद की पीठ ने जेजे अस्पताल के डीन के नेतृत्व में डाक्टरी रिपोर्ट सौंपने को कहा था। डाक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि होने वाला बच्चा अपंग नहीं होगा। 1में गर्भपात कानून बना था। 2000 में यह कानून संशोधित हुआ। 20 सप्ताह से अधिक के मामले में प्रावधान है कि केवल मां की जिंदगी (बच्चे की नहीं) खतर में होने पर गर्भपात कराया जा सकता है। अमेरिका के अधिकांश राज्यों में 24 सप्ताह के अंदर तक गर्भपात की क्षाजत है। इंग्लैंड में प्रावधान है कि अगर बच्चे के विकलांग पैदा होने की पुष्टि हो तो 24 सप्ताह तक के गर्भ का एबोर्शन हो सकता है। चीन में तो यह समय सीमा 28 सप्ताह तक है। निकेता का मामला सामने आने के बाद यह नैतिक बहस शुरू हो गयी है कि क्या अगर बच्चे के अपंग पैदा होने की आशंका हो तो गर्भपात के 20 हफ्ते की बंदिश तोड़ी जा सकती है या नहीं। इस फैसले से निकेता बहुत दुखी है। उसने कहा- क्या किसी मां के लिए यह मुमकिन है कि वह अपने बच्चे को रो- रो मरते हुए देखे। बड़ा होने के बाद जब उसका कष्ट बढ़ेगा और वह पूछे कि अगर ऐसी जिंदगी जीनी थी तो क्यों जन्म दिया? क्या इस लिए कि कानून ने बाध्य किया, तो मैं क्या जवाब दूंगी। एजेंसी

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  • Web Title: नहीं मिली निकेता को गर्भपात की इचााजत मुंबई।