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देश की जेलों व थानों में रोजाना 4 मौतें : रिपोर्ट

देश भर में रोजाना औसतन चार लोगों की मौत जेलों अथवा थानों में हिरासत के दौरान होती है और पिछले पांच वर्षो में ऐसी 7,648 मौते हुईं। इस तथ्य का उल्लेख मानवाधिकार संगठन ‘एशियन सेंटर फार ह्यूमन राइट्स’ (एसीएचआर) द्वारा जारी रिपोर्ट ‘टार्चर इन इंडिया 2008 : अ स्टेट आफ डिनायल’ में किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार देश के अशांत इलाकों में भी लगभग इतनी ही संख्या में लोग सेना अथवा अर्धसैनिक बलों की हिरासत में भी मारे गए हैं। रिपोर्ट कहती है कि इनमें से अधिकांश मौतें प्रताड़ना की वजह से होती हैं। एसीएचआर के निदेशक सुहास चकमा ने बताया कि हर साल सैकड़ों लोगों की मौत होती है कुछ को बदले में मुआवजा मिल जाता है, लेकिन केवल तीन या चार दोषियों को ही सजा मिल पाती है। पिछले 13 वर्षो में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हिरासत में हिंसा के बाद मात्र 684 मामलांे में ही मुआवजा दिलवाया। ड्ढr चकमा ने कहा कि हालांकि न्यायालयों का काम प्रशंसनीय है, लेकिन सुरक्षा बलों को राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनांे तथा दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की ओर से मिले अधिकारों के कारण उनके भी हाथ बंधे हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गत मार्च में केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने संसद में कहा था कि हिरासत में हुई मौतों में से अधिकांश मामले बीमारी प्राकृतिक मौत, हिरासत से भागने के प्रयास, आत्महत्या, अन्य अपराधियांे द्वारा हमले, दुर्घटनाओं तथा चिकित्सालयों में इलाज के दौरान होती हैं। चकमा ने कहा कि गृहमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए था कि आखिर हिरासत में कैदी इतनी बड़ी संख्या में आत्महत्या क्यांे करते हैं और उन्हें इसके लिए जरूरी सामना जसे जहर, चाकू, रस्सी, बिजली के तार आदि कैसे उपलब्ध हो जाते हैं।ं

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