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कचरा निस्तारण के लिए चागह का चयन क्यों नहीं?

रोाना निकलने वाले कूड़े कचर के समुचित बंदोबस्त की माँग वालीोनहित याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राय सरकार, लखनऊ नगर निगम सहित लखनऊ विकास प्राधिकरण से पूछा है कि म्यूनिसिपल सालिड वेस्ट नियमावली 2000 के गठन के बावाूद कूड़े कचर के निस्तारण के लिए स्थान का निर्धारण क्यों नहीं किया गया?ड्ढr न्यायमूर्ति प्रदीप कांत तथा न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय की खंडपीठ के सम्मुख स्थानीय अधिवक्ता बनवारी लाल की ओर से दायरोनहित याचिका पर वकील बी के सिंह की दलील थी कि नगर निगम द्वारा पूर शहर में करीब 500ोगहों पर रोाना 1500 टन कूड़ा खुले स्थानों पर फेंकाोाता है। इस कूड़े कचर से निकलने वाले रसायन क्रोमियम, सीसा, नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक आदि से गुर्दा रोग, कैंसर, एनीमिया, हड्डी रोग, माँस पेशिया सड़ने ौसी गंभीर बीमारियाँ फैल रही हैं। वकील का आरोप था कि नेशनल इन्वार्यन्मेण्टल रिसर्च इन्स्टीट्यूट नागपुर की रिपोर्ट में कहा गया है कि कचड़े के रिसाव से भूतल मेंोो पानीोा रहा है, वही लखनऊवासियों को पीना पड़ रहा है। वकील की दलील थी कि म्युनिसपल सालिड वेस्ट नियमावली के बनने के आठ साल बाद भी राय सरकार ने कचड़े के निस्तारण के लिएोगह नहीं निर्धारित की। निदेशक स्थानीय निकाय के 11ोुलाई 2008 के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा तीन-चार साल पहले हीोमीन के लिए 40 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं किन्तु सेनेट्री लैण्डफिल की व्यवस्था न होने के कारण पैसे का उपयोग नहीं हो पा रहा है।

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  • Web Title: कचरा निस्तारण के लिए चागह का चयन क्यों नहीं?