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देश का भविष्य सुरक्षित नहीं : गोविन्दाचार्य

वर्तमान राजनीतिक दलों के हाथ में देश का भविष्य सुरक्षित नहीं है। लोग बदलाव चाहते हैं। भारत की राजनीति अभी संक्रमण काल से गुजर रही है। लोकतंत्र अब जातितंत्र और गिरोह तंत्र का रूप ले चुका है। प्रमुख राजनीतिक पार्टियां विदेश परस्त हो गयी हैं। ये बातें राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक केएन गोविन्दाचार्य ने मंगलवार को बीआईए सभागार में आयोजित वर्तमान परिवेश में भारतीय लोकतंत्र का स्वरूप विषय पर आयोजित सेमिनार में कहीं।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन द्वारा समानांतर नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत की जायेगी। इसके लिए देश के 30 स्थानों पर संवाद आयोजित किया जायेगा। उन्होंने 22 जुलाई को विश्वास मत के सत्र के संबंध में कहा कि यह स्पष्ट दिखा कि अब सांसद सिर्फ बिकाऊ नहीं बल्कि नीलाम भी होते हैं। 22 को भारतीय संसद में अमेरिका जीता और चीन हारा। वहीं भारत हाशिए पर रहा। वर्तमान राजनीति नोट से वोट और वोट से नोट तक ही सिमटी है। परमाणु समझौते पर उन्होंने कहा कि इससे भारत की संप्रभुता पर आघात लगा है। यह समझौता न तो आवश्यक था और न ही देश को इसकी जरूरत थी। इससे बिजली मिलने की बात करना जनता को गुमराह करना है।ड्ढr ड्ढr इसके पूर्व प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि गंगा पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह दिल्ली की यमुना जसी हो जायेगी। गंगा को गोमुख से लेकर नीचे तक दो सौ से अधिक स्थानों पर गति में अवरोध पैदा किया गया है। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जनजागरण अभियान चलाया जायेगा। इसके लिए 20 व 21 सितंबर को बनारस में जल के क्षेत्र में काम करने वाले समूहों को जमा किया जायेगा। उन्होंने कहा कि गंगा विश्व की सबसे अच्छी नदी है। इसका जल 50 वर्षो में भी नहीं सड़ता है।ं

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