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एड्हाक प्राचार्यो के भरोसे मेडिकल कालेजं

राज्य के किसी भी मेडिकल कॉलेज में स्थायी प्राचार्य और अधीक्षक नहीं है। सभी काम कार्यकारी व्यवस्था के तहत किए जा रहे हैं। एक तरफ सरकार नए मेडिकल कॉलेज खोलने की कोशिश में जुटी है तो दूसरी ओर पुराने मेडिकल कॉलेजों की स्थिति दिन ब दिन गिरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग कुछ भी नहीं कर रहा है जिससे मेडिकल कॉलेजों में सुधार दिखे। पीएमसीएच का गौरव लौटाने की बार-बार दुहाई देनेवाली सरकार वहां पर वर्षो गुजर जाने के बाद भी स्थायी प्राचार्य और अधीक्षक बहाल नहीं कर सकी है।ड्ढr ड्ढr राज्य के मेडिकल कॉलेजों में टाइल्स बिछाए गए लेकिन अभी तक प्रशासनिक पदों पर स्थायी बहाली नहीं की जा सकी है। प्राचार्य और अधीक्षक की नियमित बहाली की गुत्थी नहीं सुलझानेवाले स्वास्थ्य विभाग ने कार्यकारी व्यवस्था को ‘टूल्स’ बना लिया। कुछ भी न करो तो इस ‘टूल्स’ का प्रयोग अमोघ साबित होता है। मेडिकल कॉलेजों में नियमित प्राचार्यो और अधीक्षकों की सेवानिवृति के बाद विभाग अभी तक स्थायी बहाली करने का साहस नहीं जुटा सका है। इन पदों पर वैसे डॉक्टरों की बहाली कर दी गयी है जिन्हें पर्याप्त प्रशासनिक अनुभव भी नहीं है। गौरवशाली पीएमसीएच में तीन वर्षो से नियमित अधीक्षक और एक वर्ष से नियमित प्राचार्य की बहाली नहीं हुई। डीएमसीएच में अप्रैल 2004 से प्राचार्य और अप्रैल 2007 से अधीक्षक कार्यकारी हैं। एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर के नियमित प्राचार्य और अधीक्षक 2005 से नहीं है। यहां के प्राचार्य को बेतिया मेडिकल कॉलेज का प्रभार है।ड्ढr ड्ढr जेएलएमएनसीएच, भागलपुर में नियमित प्राचार्य और अधीक्षक भी कार्यकारी हैं। इन्हें भी मधेपुरा, मेडिकल कॉलज का अतिरिक्त प्रभार है। अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज, गया में नियमित अधीक्षक 2005 से जबकि प्राचार्य अगस्त 2007 से नहीं हैं। एनएमसीएच में 2004 से अधीक्षक कार्यकारी व्यवस्था के तहत नियुक्त हैं। इधर सचिवालय स्तर के मेडिकल एजुकेशन में अपर निदेशक और परीक्षा नियंत्रक का पद भी रिक्त है।ं

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