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सोनिया-पीएम दरबार से गुरुचाी की आस

झारखंड का सीएम बनने की चाहत के साथ पांच दिनों से दिल्ली में कैंप कर रहे झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरन को आस है कि सोनिया-मनमोहन दरबार उनके हक में जल्द ही फैसला लेगा। मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान इन नेताओं से उनकी संक्षिप्त मुलाकात हुई। इस छोटी सी मुलाकात में क्या बात हुई, यह साफ नहीं हो पाया है लेकिन इसके बाद दिल्ली से लेकर रांची तक के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चा तैरने लगी।ड्ढr इस बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि शिबू सोरन अगर झारखंड के सीएम बनते हैं, तो कांग्रेस को कोई एतराज नहीं है। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से जो खबरं छनकर आ रही हैं, उसके अनुसार सीएम के लिए दावेदारी पेश कर रहे गुरुाी और उनकी पार्टी के नेताओं का कहना है कि झामुमो झारखंड में यूपीए फोल्डर का सबसे बड़ा दल है। उसके 17 विधायक हैं। फिर, गुरुाी राज्य के सबसे कद्दावर नेता हैं और झारखंड की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचानेवालों में उनका नाम सबसे ऊपर है। उनका तर्क है कि राजद और कांग्रेस को राज्य में गुरुाी का नेतृत्व स्वीकार करने में कोई गुरा नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब केंद्र की यूपीए सरकार पर संकट की घड़ी थी तो झामुमो ने पूरी निष्ठा दिखायी और इसके सांसदों ने विश्वासमत के पक्ष में मतदान किया। सीएम पद पर कांग्रेस और राजद के शीर्ष नेतृत्व से गुरुाी की भले दो-टूक बात न हुई हो, लेकिन उन्होंने कांग्रेस के साथ-साथ राजद सुप्रीमो तक अपनी भावनाएं पहुंचा दी हैं और जल्द ही ‘उचित फैसले’ की आस है। हालांकि राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस और राजद गुरुाी की इच्छा पर सहमत भी हो जायें तो उन्हें निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी। मार्च 2004 में नौ दिनों के लिए राज्य के मुख्यमंत्री बने श्री सोरन को महा एक विधायक के समर्थन के अभाव में इस्तीफा देना पड़ा था।

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