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जजों पर एफआईआर पर छिड़ी बहस

गाजियाबाद पीएफ घोटाले की सुनवाई कै दौरान सुप्रीम कोर्ट में उस समय एक नई बहस छिड़ गई जब पूर्व कानून मंत्री शांतिभूषण ने कहा कि जजों पर एफआईआर करने से रोकने वाला वीरास्वामी फैसला बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस फैसले में एफआईआर न करने की व्यवस्था मुख्य फैसला नहीं है, बल्कि फैसले के समर्थन में की गई टिप्पणियां (ओबिटर डिक्टा) हैं जिनका पालन करना जरूरी नहीं होता। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बीएन अग्रवाल, जीएस सिंघवी और वीएस सिरपुकर की तीन जजों की पीठ इस तर्क से चकित रह गए। भूषण ने कहा, ‘जस्टिस के वीरास्वामी रिटायर जज थे और 1में इस फैसले के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन पांच जजों की पीठ ने इसमें वर्तमान जजों के बार में भी राय दे दी और कहा कि वर्तमान जजों के खिलाफ मुख्य न्यायाधीश की अनुमति से ही केस दर्ज हो सकता है। इसे मुख्य फैसला नहीं माना जा सकता।’

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  • Web Title: जजों पर एफआईआर पर छिड़ी बहस