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राजरंग

बड़ी देर भयी नंदलाला..बड़ी देर भयी नंदलाला, तेरी राह तके ..। यहां उ केस नहीं है, जिसमें बृजबाला राह तकती हैं। यहां केस थोड़ा डिफरंट टाइप का है। पूरी पब्लिके राह तक रही है। केतना एके बतवा बोलें। वही पुराना केस है। अपने गुरु कब सीएम का एप्वायंटमेंट लेटर लेकर आयेंगे और कब उनका राजतिलकहोगा? कब इ सीन देखने को मिलेगा। पता नहीं का होगा? कुछ बुझाइये नहीं रहा है। स्टेट का लोग गुरु की तरफ टकटकी लगइले है। गुरु अपने पॉलिटिकल फ्रेंडवन के साथ दिल्ली में मैन-टू-मैन कांटैक्ट कर में लगल हैं। लेकिन कुछ सेटिंग होइये नहीं रहा है। आज के डेट में यही बुझा रहा है कि जहां से चले थे, वहीं आज भी खड़े हैं। अब गुरु करं भी तो का करं? कोई अकेली पार्टी का केस तो है नहीं। दिल्ली में मैडम के बाद कइ गो सर से मिलना है। सब सर लोग अपना-अपना जब सिर हिला देंगे, तब समझिये कि थोड़ा काम हुआ। फिर हिंया आकर इंडिपेंडेंट लोग का कंसेंट लेना होगा। मीटिंग, सीटिंग और इटिंग के बाद गेटिंग-सेटिंग करना होगा। जब सभे मुंह से एके बात निकलेगी, तभे बुझिये कि गुरु का काम बना। एट लास्ट बट नॉट लिस्ट- अपने लाट साहब भी परफेक्ट गिनती गिनवा लेंगे। तभे गेम फाइनल होगा। इस बार उ भी कोइयो रिस्क नय लेवेंगे, का समझे?

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