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प्रतिभाओं को निखारं शिक्षक : तुबिद

शिक्षा सचिव जेबी तुबिद ने कहा कि छात्रों का अधिकांश समय स्कूलों में बीतता है। इस दौरान उनके व्यक्तित्व, स्वभाव, शिक्षण आदि को निखारने में शिक्षकों की अहम् भूमिका होती है। ऐसे में उन्हें छात्रों की मनोवृत्ति को समझने का कौशल जानना जरूरी है। वह छह अगस्त को सीआइपी में छात्रों में मनो वैज्ञानिक समस्याएं : पहचान एवं समाधान विषयक कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। इसमें बिहार और झारखंड के विभिन्न स्कूलों से 40 शिक्षक भाग ले रहे हैं।ड्ढr सचिव ने कहा कि वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में 60 फीसदी शिक्षक अनुपस्थित रहते हैं। यहां 50 फीसदी से अधिक बच्चे स्कूल नहीं आते हैं। वर्तमान स्थिति में उन्हें स्कूल जाने के लिए प्रेरित करना प्राथमिकता होना चाहिये। सरकार ने वर्ष 2010 तक साक्षरता दर बढ़ाकर 80 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। सीआइपी के प्रो. डी राम ने कहा कि मानसिक समस्या गंभीर चुनौती बनती जा रही है।ड्ढr आयोजक सचिव डॉ देवब्रत कुमार ने कहा कि स्कूली शिक्षा के दौरान छात्रों की मनो वैज्ञानिक समस्याओं का समाधान हो जाने से उनका प्रोडक्टीव इयर बच जायेगा। रिनपास के डॉ अमोल रांन सिंह ने विषय को रुचिकर बनाकर पेश करने का सुझाव दिया।ड्ढr कार्यशाला में डॉ संजय कुमार मुंडा, डॉ अरणव भट्टाचार्य, डॉ अलका निजामी ने भी विचार रखे। इस अवसर पर नरंद्र कुमार सिंह, मुकुल कुमार, बीडी गौतम, सूर्यदेव आदि भी मौजूद थे।

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