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सुदूर गांव भी हो सकेंगे जगमग

संचरण व वितरण व्यवस्था दुरुस्त होने के बाद बिहार को अगले दो वर्षो में कम से कम चार हजार मेगावाट से अधिक बिजली की जरूरत होगी। सूबे में चल रहे बिजली सुधार कार्यक्रम के पूरा होने के बाद बिहार की खपत में चार गुनी तक की वृद्धि होगी। पावरग्रिड द्वारा बिहार में त्वरित ऊर्जा सुधार कार्य (एपीडीआरपी) किए जा रहे हैं। इसके तहत संचरण व्यवस्था दुरुस्त करने के साथसाथ पुराने सब स्टेशनों का जीर्णोद्धार और नए सब स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है। एपीडीआरपी का पहला फेज पूरा हो चुका है और दूसर फेज का काम तेजी से चल रहा है। वर्ष 2010 तक ये चरण भी पूरा हो जाएगा। इसके बाद बिहार को कम से कम पांच हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी।ड्ढr ड्ढr इस समय बिहार के पास एक हजार मेगावाट बिजली की ही उपलब्धता है जबकि अधिकतम मांग 2000 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। दूसर चरण का काम पूरा होने के बाद सुदूर गांवों को जगमगाने का सपना पूरा होगा और जहां दशकों से बिजली की प्रतीक्षा हो रही है, वहां रोशनी पहुंचेगी। पावरग्रिड के एक अधिकारी के अनुसार पहले जहां 600-700 मेगावाट बिजली की आपूर्ति में ही सांस फूलने लगती थी वहीं दो साल में सूबे का कायापलट होने वाला है। पहले चरण में 18 ग्रिड का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि दूसर चरण तक 25 और ग्रिड बनने हैं। इस तरह सूबे में कुल 43 नए ग्रिड सब स्टेशन का निर्माण होना है। इस क्रम में 2800 किलोमीटर नई संचरण लाइन बनाई जाएगी, जबकि 1100 किलोमीटर संचरण लाइन की क्षमता बढ़ेगी। इन सबके निर्माण के बाद बिहार की क्षमता में 3500 मेगावाट तक की वृद्धि हो जाएगी। इस तरह वर्ष 2010 तक बिहार को 5500 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी।ं

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