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भविष्य निधि घोटाला : सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

भविष्य निधि घोटाले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के जज ने सुनवाई करने से मना कर दिया। तीन जजों की खंडपीठ ने जजों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी होने के कारण इसकी सुनवाई से मना किया। इस पर अंतिम फैसली अब मुख्य न्यायाधीश करेंगे। गाजियाबाद के इस 23 करोड़ के घोटाले में 23 जज शामिल हैं, जिसमें कुछ उच्च न्यायालय तथा एक सुप्रीम कोर्ट का है। तीन जजों की बेंच न्यायाधीश बीएन अग्रवाल, वीएस सिरपुरकर तथा जीएस सिंघवी ने इस पर तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया, क्योंकि याचिका में जजों के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां थी। यह याचिका भूतपूर्व शांति भूषण तथा उनके पुत्र प्रशांत भूषण ने दायर की है। जस्टिस अग्रवाल ने इसपर अपना फैसला सुनाया, जबकि दो अन्य जजों ने इसपर कोई भी टिप्पणी देने से परहेज ही किया। अब इस मुद्दे पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ही करेंगे। इससे पहले उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने संकेत दिया था कि प्रधान न्यायाधीश या संबद्ध उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बिना मौजूदा और सेवानिवृत न्यायाधीशों के खिलाफ पुलिस जांच के मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को सौंपा जा सकता है। याचिकाकर्ताआें के वकील अनिल दीवान ने आरोप लगाया है कि गाजियाबाद के जज के अधीन कार्यरत कोर्ट के एक कर्मचारी आशुतोष अस्थाना घोटाले में जज की कथित भागीदारी को स्वीकार किया। इस मामले में 83 अभियुक्तों में से 75 के खिलाफ आरोपपत्र पहले ही दायर किए जा चुके हैं।

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  • Web Title: पीएफघोटाला : सुनवाई से कोर्ट का इनकार