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शर्मनाक! सरकार की नाकामी है यह

नामकुम में दस साल में भी रलवे ओवर ब्रिज का निर्माण नहीं होना केंद्र एवं राज्य की विफलता है। सरकार यहां की जनता को फ्लाई ओवर देने में सक्षम नहीं है। किसी राज्य की राजधानी का यह हाल है, तो जिलों और दूर दराज के गांवों की क्या स्थिति होगी। यह सरकार के लिए शर्मनाक है। यह टिप्पणी गुरुवार को को हाइकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की। जस्टिस एमवाइ इकबाल एवं जस्टिस जया रॉय की बेंच ने छह माह में इस फ्लाइ ओवर का निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि छह माह में निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ, तो कोर्ट संबंधित अधिकारियों के खिलाफ स्वत: संज्ञान ले अवमानना का मामला चलायेगी। कोर्ट ने महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह सीएस के साथ बैठक करं और सीएम के समक्ष भी इस बात को रखें। कोर्ट ने कहा कि दस साल से यह मामला लंबित है। दो बार आदेश दिये गये। निर्माण कार्य शुरु नहीं होने पर अवमानना की प्रक्रिया चलाने पर विचार हुआ, लेकिन अधिकारियों की अंडरटेकिंग के बाद कोर्ट ने बैठक कर सभी मामले तय कर निर्माण कार्य शुरू करने का निर्देश दिया। यह गंभीर मामला है और हम इसे गंभीरता से ही ले रहे हैं। धनंजय दुबे ने यह जनहित याचिका दायर की है। तीन माह में ही बनते हैं फ्लाइ ओवर: कोर्ट ने कहा कि बड़े- बड़े शहरों में तीन माह में ही बड़े- बड़े ओवर ब्रिज- फ्लाई ओवर बन जाते हैं, लेकिन झारखंड में ऐसा क्यों नहीं होता है। अधिकारियों को इस बात की जानकारी लेनी चाहिए, कि इन शहरों में कैसे काम होता है।

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