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स्टरलाइट व पोस्को को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिए दो महत्वपूर्ण आदेशों में दो निजी कंपनियों को उड़िसा में अल्यूमीनियम और स्टील प्रोजेक्ट लगाने की अनुमति दे दी। अल्युमीनियम प्रोजेक्ट स्टरलाइट कंपनी का है जबकि स्टील प्रोजेक्ट दक्षिण कोरिया कंपनी पोस्को का है। यह कंपनी विश्व में तीसरी सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केाी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली तीन जजों की विशेष फारस्ट बेंच ने यह आदेश दिया। बेंच ने पर्यावरण और वन मंत्रालय से कहा है कि इस संबंध में आवश्यक क्लीयरंस देकर प्रोजेक्टों को चालू करवाए। वन्य क्षेत्र और पर्यावरणीय नुकसान संभावित क्षेत्रों में खनन तथा औद्योगिक प्रोजेक्ट लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति आवश्यक है। पर्यावरणीय प्रभाव की जांच के लिए सुप्रीमकोर्ट ने एक मानिटरिंग कमेटी बना रखी है। कमेटी की सिफारिशों पर ही किसी प्रोजक्ट को सर्वोच्च अदालत की अनुमति मिलती है। कोर्ट ने स्टरलाइट कंपनी का यह यह आग्रह स्वीकार कर लिया कि वह अपने लाभ का कुल दस फीसदी या 10 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष स्थानीय क्षेत्र विकास के लिए देगी। लाभ राशि की गणना की जिम्मेदारी कोर्ट ने सीईसी (सुप्रीम कोर्ट की मानिटिरिंग कमेटी) को दी है। सीईसी हर वर्ष कंपनी के लाभ की गणना करगी और उसके अनुसार विकास फंड की राशि तय करगी। पोस्को के 51 हाार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए उड़िसा खनन निगम लौह अयस्क की निर्बाध आपूर्ति करगा। यह अयस्क क्योंझर जिले के नियामगिरी पर्वत से लाया जाएगा जो प्रोजेक्ट से 300 किलोमीटर दूर है।

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