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कैसे पूरा होगा बिजली उत्पादन का लक्ष्य

ेंद्रीय वन मंत्रालय और कोयला मंत्रालय के बीच मतभेद चलता रहा तो, ऊरा उत्पादन का लक्ष्य प्रभावित होगा। इससे झारखंड भी अछूता नहीं रहेगा। कोल इंडिया ने वन मंत्रालय पर कोल ब्लॉकों के लिए फॉरस्ट क्लीयरंस में देरी करने का आरोप लगाया है। इसका वन मंत्रालय ने प्रतिवाद किया है। मंत्रालय का कहना है कि पिछली बैठक में तीन साल से किसी भी आवेदन के लंबित रहने की बात नहीं बतायी गयी थी।ड्ढr देश में वर्ष 2012 तक 2 लाख 26 हाार 577 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 67 प्रतिशत हिस्सेदारी कोयले से उत्पादित बिजली का होगा। इसके लिए कोयला उत्पादन में वृद्धि जरूरी है। यह तब होगा, जब नये आवंटित दो दर्जन से अधिक कोल ब्लॉकों से उत्खनन शुरू हो।ड्ढr कोयला सचिव का कहना है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय चाहता है कि सभी कोयला परियोजनाओं की स्थापना पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रख कर ही किया जाये। इसका हमें भी ख्याल है। इसलिए वन मंत्रालय को समयबद्ध ढंग से एनओसी देना चाहिए।ड्ढr सीसीएल के पर्यावरण महाप्रबंधक सुमित घोष ने स्वीकार किया कि दिसंबर 07 से राज्य और कोल इंडिया की कई इकाइयों के आवेदन फॉरस्ट क्लीयरंस के लिए लंबित है। आरा, अरगड्डा, गिद्दी, केदला ओसीपी, लइयो, कुाू, पुंदी, रलिगढ़ा, सारूबेरा, सिरका, तोपा, गोविंदपुर, केदला यूजीपी, केडीएच, करमा और थरमी सहित राज्य के 17 कोल ब्लॉक इनमें शामिल हैं। हाल में पांच को मंजूरी मिली है।

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