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विश्वविद्यालय कर्मियों की मुख्य मांगों की समीक्षा की नीतीश ने

हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के साथ हुए समझौते को लागू करने की कवायद शुरू कर दी है। इस बात का आकलन किया जा रहा है कि मांगों को पूरा करने में सरकार पर कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को 1,अणे मार्ग में शीर्ष मंत्रियों और अधिकारियों के साथ विश्वविद्यालय कर्मियों की मुख्य मांगों की समीक्षा की और मानव संसाधन विकास विभाग से खर्च होने वाली राशि का हिसाब मांगा।ड्ढr ड्ढr हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के साथ हुए समझौते को एक माह में लागू करने का आदेश दिया है। वैसे हाईकोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद ही विभाग यह तय करगा कि समझौते के अनुरूप किन-किन मांगों को पूरा किया जाए। विश्वविद्यालयकर्मियों के साथ 18 जुलाई 2007 को हुए समझौते में सरकार ने 50 फीसदी महंगाई भत्ते को मूल वेतन में विलय, चिकित्सा भत्ता 100 रुपये करना, राज्य सरकार के समान वेतनमान निर्धारण, 240 दिनों के अर्जित अवकाश के संचयन, विवि अभियंता, कनीय अभियंता व बिजली मिस्त्री के वेतन विसंगति का निराकरण समेत 11 मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था। इनके पूरा नहीं होने के कारण ही विश्वविद्यालयकर्मी 1 जुलाई से हड़ताल पर थे।ड्ढr ड्ढr बैठक में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, मानव संसाधन विकास मंत्री हरिनारायण सिंह, ग्रामीण कार्य मंत्री वृशिण पटेल और मुख्य सचिव आर.जे.एम. पिल्लै भी शामिल थे। बैठक के बाद मानव संसाधन विकास विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि सरकार यह देख रही है कि मांगों को पूरा करने में वित्तीय बोझ कितना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि शनिवार तक उन्हें कोर्ट के आदेश की प्रति मिल जाएगी उसके बाद खर्च होने वाली राशि का हिसाब लगाया।

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  • Web Title: विश्वविद्यालय कर्मियों की मुख्य मांगों की समीक्षा की नीतीश ने