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इरकॉन-सीपीडब्ल्यूडी के काम से सरकार असंतुष्ट

सीपीडब्ल्यूडी और इरकांॅन द्वारा बनाये जा रहे स्टेट हाइवे की गुणवत्ता की जांच आईआईटी रूड़की के इंजीनियर करंगे। राज्य सरकार ने दोनों ही निर्माण एजेंसियों द्वारा संतोषजनक काम नहीं करने पर चिन्ता प्रकट की है। गुरुवार को इन सड़कों की समीक्षा के बाद पथ निर्माण मंत्री डा. प्रम कुमार ने कहा कि इरकॉन को निर्माण कार्य में अपेक्षित प्रगति लाने का निर्देश देते हुए मार्च 2010 तक निर्माण पूरा करने को कहा गया है। केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को दिसम्बर 200तक सड़कें बनाने का निर्देश दिया गया है।ड्ढr ड्ढr उन्होंने बताया कि इरकॉन को 608 करोड़ रुपए की लागत से 330 किमी. स्टेट हाइवे के निर्माण की जिम्मेवारी दी गई है।सीपीडब्ल्यूडी को 2325 करोड़ रुपए की लागत से 1705 किमी. स्टेट हाइवे के निर्माण का जिम्मा दिया गया है। इरकॉन ने अब तक 262 किमी. सड़क में मात्र मिट्टी भराई का काम किया है। 26 बड़े पुलों और 36 कलवर्ट का निर्माण अभी प्रक्रिया में है। इस संदर्भ में इरकॉन के अधिकारी ने मंत्री को बताया कि काम धीमी होने का एक मुख्य कारण बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ऊंचे सड़कों का निर्माण करना है। मामला कोर्ट में रहने के कारण दरभंगा शहर में काम बाधित है। सीपीडब्ल्यूडी ने अब तक 1447 किमी. सड़क में मिट्टी भराई का काम किया है।ड्ढr ड्ढr डा. कुमार ने कहा कि कई बार निर्देश देने के बावजूद सुलतानगंज-दर्दमारा पथ का निर्माण अब तक 70 फीसदी हुआ है। इसे श्रावणी मेला के पूर्व किसी भी हालत में पूरा करना है। कांवरियों के लिए इस मार्ग का निर्माण अत्यन्त जरुरी है। उन्होंने अपने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि फॉरस्ट क्िलयरंस और बिजली पोलों के हटाने से संबंधित कार्यों में निर्माण एजेंसियों को प्राथमिकता के आधार पर सहयोग और पहल करके निबटारा कराएं।ड्ढr ड्ढr 60 दिनों में निष्पादन अनिवार्यड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। मुख्यालय को प्राप्त आवेदन जिलों में भेजकर उसे निष्पादित मान लेते हैं सरकारी विभाग। ऐसा करने से शिकायतकर्ता अथवा फरियादी को राहत तो नहीं मिलती पर विभागों का रिकॉर्ड जरूर दुरुस्त हो जाता है। जन शिकायतों पर कार्रवाई में हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद सरकार ने इनके निपटारे की समय सीमा तय कर दी है। अब आवेदनों का निपटारा 60 दिनों के भीतर ही करना होगा।ड्ढr ड्ढr पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अपने अधीनस्थ कार्यालयों को शिकायतकर्ता का आवेदन भेज कर उसे निष्पादित मानने का अनुरोध किया था। विभागों के रवैये से चकित जन शिकायत सेल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आवेदनों के निपटार का मतलब उसे अधीनस्थ कार्यालय के हवाले करना भर नहीं है बल्कि काम को अंतिम परिणाम तक पहुंचाना पड़ेगा। संबंधित विभागों को कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट एक्शन टेकेन लेटर (एटीएल) के साथ जन शिकायत सेल को देनी होगी। ताकि शिकायतकर्ता को भी वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके। गत दिनों समीक्षा के दौरान जन शिकायतों पर विभागों और नोडल अफसरों की कार्रवाई रिपोर्ट में भारी अंतर पाया गया था। लिहाजा सरकार ने सभी विभागों को काम में कोताही बरतने वाले सरकारी कर्मियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई करने के भी निर्देश दे दिये हैं।

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  • Web Title: इरकॉन-सीपीडब्ल्यूडी के काम से सरकार असंतुष्ट