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दुनिया ने देखा चीन का सपना

एक अरब तैंतीस करोड़ पंखों वाले महाकाय ड्रैगन ने लंबी सी जम्हाई लेकर अपनी आंखें खोलीं तो दुनिया की सबसे पवित्र खेल प्रतिस्पर्धा की मेजबानी करने का सपना साकार हो रहा था। 36 किमी लंबे इस्पात के पत्तर को तोड़मोड़ कर बनाए गए बर्डस नेस्ट स्टेडिय म में चकाचौंधरोशनी के बीच 8 अगस्त वर्ष दो हाार 8 को 8 बजकर 8 मिनट पर 2वें ओलंपिक खेलों का उम्मीदों और अरमानों से भरा सफर शुरू हो गया और दुनिया ने ‘बंद’ चीन के खुले दिल को देखा। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जगमगाती आतिशबाजी के बाद 205 देशों के खिलाड़ियों ने अपने-अपने देशों का झंडा थाम दर्शकों का स्वागत किया। पारंपरिक परिधान में सजे 56 खिलाड़ियों वाले भारतीय दल का नेतृत्व शूटिंग में ओलंपिक पदक विजेता राज्यवर्धन राठौर ने किया। अगले पंद्रह दिनों तक इस पवित्र प्रतियोगिता में मानव क्षमताओं के नए कीर्तिमान स्थापित होंगे।ड्ढr ऐतिहासिक संस्कृति और आधुनिक तकनीक के लाजवाब तालमेल के बीच इंसान और मशीन के सहयोग की सुंदर छटा बिखेरता ओलंपिक खेलों का ऐसा भव्य उद्घाटन समारोह पहले कभी देखा नहीं गया। खेलों की सुपर पावर बनने को बेकरार चीन ने अपने इरादों की झलक दिखा दी है। चीन की सतरंगी संस्कृति और गौरवपूर्ण इतिहास एक दूसरे के आगोश में थिरक रहे थे। बातें चीन की, मगर जुबान दुनिया की। अनजाना होकर भी सब कुछ जाना पहचाना सा लग रहा था। बर्डस नेस्ट स्टेडियम में मौजूद हजार दर्शक और टेलीविजन सेटों के सामने कई अरब जोड़ी आंखें चमक उठीं। इस पल की तैयारी में चीन के हजारों कलाकार तीन साल से लगे हुए थे। आखिर उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने जो समां बांधा उसकी नजीर शायद ही मिले। अपने देश की हजारों साल पुरानी सभ्यता को घंटे भर में दुनिया के सामने उड़ेल देना कोई आसान काम नहीं था मगर चीन के मशहूर फिल्मकार झांग ई माउ ने अपनी कल्पना के परवाज से इसे सहज बना दिया।ड्ढr स्टेडियम में लहराते सफेद मीनारों, चकाचौंध रोशनियों, ट्रैक पर बहते कलाकारों और कुंग फू उस्तादों के समंदर में जैसे हर कोई बह गया।ड्ढr चौकसी ऐसी थी कि परिंदर भी पर न मार सके। चीन ने एथेंस ओलंपिक की तुलना में दुगनी राशि उद्घाटन और समापन समारोह की भव्यता पर खर्च की है। इस वादे के साथ कि यह अब तक के सर्वश्रेष्ठ ओलंपिक होंगे।ड्ढr उद्घाटन समारोह में अम्ेािरका के राष्ट्रपति जार्ज बुश समेत विश्व के तकरीबन 86 शीर्ष नेता मौजूद थे। राजाओं, राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के इस हुजूम में भारत की तरफ से कांग्रेस और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी अपने बच्चों राहुल और प्रियंका के साथ मौजूद थीं।ड्ढr शुरुआत हुई प्राचीन चीन के नगाड़ों फाउ की गूंज से। इसके बाद बारी थी ओलंपिक छल्लों और चीन के राष्ट्रध्वज की। घंटे भर का शुरुआती कार्यक्रम खत्म होने के बाद स्टेडियम में 205 देशों के लगभग 10500 एथलीटों की परेड शुरू हो गई। टीमों की कतार इस दफा अलग थी। सबसे पहली वह टीम की जिसके देश का नाम चीनी भाषा में लिखने में सबसे कम स्ट्रोक लगते हैं। इस लिहाज से भारत का नंबर 55वां रहा। सबसे आगे यूनान की टीम थी, जहां से 18में ओलंपिक का सफर शुरू हुआ था। चीन के 63एथलीट मेजबान होने के नाते सबसे आखिर में स्टेडियम में आए। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) और आयोजन समिति के प्रमुखों के भाषण हुए। एथलीटों और रेफरियों की ओर से शपथ ली गई और आसमान में कबूतरों की परवाज के बीच स्टेडियम में ओलंपिक ज्योति लहरा उठी।ड्ढr स्टेडियम चीन के पॉप स्टार लियू हुआन और ब्रिटिश गायक सारा ब्राइटमैन के सुरताल से सज गया। दुनिया भर से जमा किए गए हजारों मुस्कराते चेहरों की तस्वीरें समूचे माहौल में खिल उठीं। आतिशबाजों ने अपनी कलाकारी से आसमान में 2008 मुस्कराते चेहरे टांक दिए। जिस देश ने बारूद को जन्म दिया है वहां आतिशबाजी का लाजवाब होना तो तय ही था।ड्ढr आकाश में लेजर किरणों से बने ओलंपिक छल्लों को सिर उठा कर देखने में लगे लोगों को जमीन पर गिरी अपनी टोपी तक की सुध नहीं रही। 40 अरब डॉलर के भारीभरकम खर्च और सात साल की तैयारी का पहला सिला सबकेसामने था।

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