DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

१०प्रतिशतछात्र भी नहीं करना चाहते पीचाी

लखनऊ विश्वविद्यालय व कॉलेाों से स्नातक करने के बाद दस फीसदी छात्र भी पोस्ट ग्रेाुएट (पीाी) की पढ़ाई नहीं करना चाहते। इसके कारण कई कोर्सो में सीटों के मुकाबले आधे आवेदन भी नहीं आए हैं। पिछले साल पीाी स्तर पर खोले गए 30 कोर्सो में से 12 कोर्स बंद हो गए हैं और कई इस बार बंदी की कगार पर हैं। पीाी में तेाी से घटते रुझान के कारण शोध कार्यो पर भी खतरा पैदा हो गया है।ड्ढr लविवि व कॉलेाों में स्नातक पढ़ने वाले कुल 75 हाार छात्रों के मुकाबले पीाी की सिर्फ 6665 सीटें ही उपलब्ध हैं। लविवि में डिप्लोमा इन वीडियो प्रोग्राम प्रोडक्शन, एमएससी सेल एंड मॉलीक्युलर बॉयोलााी, एमएससी अक्षय ऊरा, एमएससी मैटिरियल साइंस, एमएससी नैनोटक्नोलाॉी, पीाी डिप्लोमा गांधी विचारधारा, इलेक्ट्रानिक मीडिया एंड फिल्म प्रोडक्शन सहित 12 से अधिक कोर्स बंद कर दिए गए। इस साल लविवि में एमए सोशल इांीनियरिंग, पीाी डिप्लोमा इन हेल्थ एंड हाईाीन, एमए योर्तिविज्ञान, एमए वूमेन्स स्ट्डीा पीाी डिप्लोमा इन वास्तुशास्त्र, पीाी डिप्लोमा इन काउंसिलिंग एंड कम्युनिकेशन, पीाी डिप्लोमा इन हास्पिटल एंड हेल्थ केयर मैनेामेंट, पोस्ट ग्रेाुएट डिप्लोमा इन लिंग्वस्टिक, पीाी डिप्लोमा इन ह्युमन डेवलमेंट, सहित र्दान भर कोर्स में सीटों के मुकाबले आधे आवेदन आए हैं। विवि ने इस बार सभी कोर्सो की फीस भी 30 प्रतिशत से लेकर दोगुने तक बढ़ा दी है। अब सिर्फ वही छात्र पीाी कर रहे हैंोिन्हें शोध कार्य करके शिक्षक बनना है। लविवि के प्रवक्ता प्रो. दिनेश कुमार कहते हैं किोब छात्र स्नातक नहीं करना चाहते तो पीाी पढ़ने वालों का टोटा तो होगा ही।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: १०प्रतिशतछात्र भी नहीं करना चाहते पीचाी