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लखनऊ से भरी दिल्ली की हुँकार

एलान चुनावी महासमर में अकेले कूदने का। लक्ष्य दिल्ली की गद्दी पर कब्जा। कोशिश- दलित बेस वोट बैंक को सँजोए रखने और जनाधार को और व्यापक रूप देने की। इसके समर्थन में राजधानी लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में उठे लाखों हाथ। यानी इस मामले में बसपा का राष्ट्रीय अधिवेशन अपने मकसद में कामयाब रहा। मायावती अपने समर्थकों में उत्साह का वार पैदा करने में सफल रहीं कि पार्टी की अगली मंजिल दिल्ली की हुकूमत है। उन्होंने आगाह कर दिया कि इस लक्ष्य के रास्ते में रोड़ा अटकाने वाले दुश्मन दल कौन से हैं।ड्ढr रमाबाई अंबेडकर मैदान में दोपहरी की उमस भरी गर्मी में पार्टी प्रमुख मायावती के आक्रामक तेवर बसपा के शुरुआती दिनों की याद दिला रहे थे। पहली बार वह कांग्रस पर इतनी हमलावर दिखीं कि उन्होंने महात्मा गांधी से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक का न केवल नाम लिया, बल्कि उन्हें दलित उत्थान के मामले में कटघर में खड़ा भी किया। उन्होंने कहा कि युवराज राहुल गांधी का दलित प्रम उसी तरह झूठा और छलावा है जैसा इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का था।ड्ढr इसी के साथ उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश भी दिया कि दलितों के यहाँ खाना खाने और कलावती-फलावती की कहानी सुनाने से दलितों की हालत नहीं सुधरने वाली। इसके लिए केन्द्र में बसपा की सरकार बननी जरूरी है। एसी सरकार जो पूँजीपतियों के चंदे से बनी सरकारों की तरह गरीब विरोधी आर्थिक नीतियाँ नहीं बनाएगी।ड्ढr छोड़ा उन्होंने केन्द्रीय मंत्री लालू प्रसाद यादव और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को भी नहीं। लंबे समय बाद पुराने तेवर में वह सबको चुनौती देती दिखाई दी। उनके तेवरों से वर्ष 1े कांशीराम की याद आने लगी।ड्ढr खूब हुई नारबााी : पेा 2

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