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भागलपुर में नरेगा योजना चारों खाने चित

भागलपुर में चारों खाने चित हो गई है। गरीबों को काम देकर पलायन रोकने के लक्ष्य में यह पूरी तरह विफल रही है। अफसर और पंचायत प्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण राशि खर्च नहीं हो रही है। लोगों को जॉब कार्ड का झुनझुना तो थमा दिया गया लेकिन काम नहीं मिल रहा है। रोगार के लिए दूसर राज्यों में लोगों के पलायन का सिलसिला जारी है।ड्ढr चालू वित्तीय वर्ष में नरगा के तहत केन्द्र से जिले को पांच करोड़ रुपए मिले लेकिन 70 पंचायतों में मुखियों ने राशि ही नहीं खर्च की। इसके चलते अभी तक दूसरी किस्त की मांग नहीं की जा सकी है। मुखियों और रोगार सेवकों को नोटिस जारी किया गया है। डीडीसी लक्ष्मी सिंह चौहान ने इस साल 12 लाख मानव दिवस के सृजन का दावा किया है। पिछले वित्तीय वर्ष में 1रोड़ रुपए मिले थे लेकिन मात्र 13 करोड़ खर्च हुए। 70 योजनाओं में 56 हाार 874 कार्डधारियों को ही काम दिया गया। जबकि जिले में 2 लाख 22 हाार जॉब कार्डधारी हैं। डेढ़ लाख से अधिक कार्डधारी जॉब के इंतजार में हैं।ड्ढr ड्ढr उनका कहना है कि नरगा के काम में मशीन से मिट्टी कटाई की जा रही है। मजदूर कम लगाए जा रहे हैं। फर्ाी मस्टर रॉल तैयार कर मानव दिवस के सृजन का बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़ा पेश किया जा रहा है। जिले के दौर पर आए ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अनूप मुखर्जी ने गोराडीह प्रखंड में यह मामला पकड़ा था। जिन लोगों को काम मिल रहा है उनको समय पर मजदूरी नहीं मिल रही। बैंक और डाकघर के जरिए मजदूरी का भुगतान करना है लेकिन अभी तक मात्र 75 हाार कार्डधारियों का खाता खोला गया है।ड्ढr ड्ढr मजदूरी में देरी के चलते कई जगह लोग नरगा में काम करने से कतराने लगे हैं। रोगार की खोज में हर रो बड़ी संख्या में लोग पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई जा रहे हैं। अफसरों द्वारा प्रभावकारी मानीटरिंग नहीं किए जाने के कारण भी नरगा का बंटाधार हो रहा है।

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