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ध्यान क्यों न दें?

भाजपा को तमाचाड्ढr क्या आप मायावती को प्रधानमंत्री मान लेंगे? सीधा-सा उत्तर था- प्रधानमंत्री वर्धन बनें या मायावती या और कोई बने, यह सवाल बाद का है। फिलहाल हमें अविश्वास प्रस्ताव के एक लक्ष्य को पूर्ण करना है। अपने तेरह दिन के शासनकाल में अगर अटलजी अपनी पार्टी के तीन-चार मुख्य लक्ष्यों का उल्लेख करके एसी ही घोषणा कर देते कि जो पार्टी इनमें से किसी एक लक्ष्य की पूर्ति कराएगी, उसे हमारा पांच साल तक पूर्ण समर्थन मिलेगा तो अगले चुनाव में भाजपा की ही जय-ायकार होती।ड्ढr यशपाल शास्त्री, विकास नगर करार पर बहस होनी चाहिएड्ढr जिस दिन से वामपंथी दलों ने करार का विरोध करना शुरू किया था, उसी दिन से आम जनता यह जानना चाहती थी कि अमेरिका से यह करार करना उसकी गुलामी स्वीकार करना कैसे हो जाएगा? भाजपा का भी आरोप था कि यह बराबरी का करार नहीं है, किन्तु विश्वासमत पर चर्चा में दोनों ने यह बात स्पष्ट नहीं की, इसे महंगाई के मुद्दे से लपेट कर इसके बार में खुली चर्चा नहीं होने दी। आम जनता करार को समझना चाहती थी, पर महंगाई पर भाषण पीना पड़ा। अच्छा हो, सरकार करार की बात स्पष्ट कर।ड्ढr राजनारायण आर्य, सलोरी, इलाहाबाद नेपाल में हिन्दी विरोधड्ढr अफसोस की बात है कि पड़ोसी देश में भारत विरोधी विचारधारा मजबूती से जड़ें जमा रही है। वहां मधेशी और माओवादी ऐसी दो धाराएं उत्पन्न हो गई हैं, जिनमें 36 का आंकड़ा है। हालांकि मधेशियों की ओर से ऐसा कुछ नहीं किया जाता कि तनाव उत्पन्न हो, लेकिन माओवादी ऐसा कोई मौका नहीं चूकते, जिससे वे नेपाल में तनाव व हिंसा फैला सकें। अभी हाल में नेपाल के राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति के पदों पर जीते मधेशी उम्मीदवारों द्वारा अपने-अपने पदों की हिन्दी में शपथ लेना। विजयी प्रत्याशियों ने हिन्दी में शपथ क्या ली माओवादियों ने नेपाल में हंगामा कर दिया। हिन्दी को लेकर बवाल क्यों?ड्ढr इन्द्र सिंह धिगान, दिल्ली डॉक्टर वास्तव में भगवानड्ढr कहते हैं कि पृथ्वी पर डॉक्टर ईश्वर का दूसरा रूप होता है। यह कहावत उस समय चरितार्थ हो गई जब आतंकवाद का शिकार होते हुए भी अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने कर्तव्यपरायणता और अपने पेशे की सच्ची तस्वीर पेश की। रात-दिन एक करके उन्होंने मृत और घायलों के प्रति अपनी सही कार्यप्रणाली का परिचय दिया।ड्ढr नरेन्द्र कुमार बत्रा, गाजियाबाद नेताजी के नामड्ढr डील के नाम पर उखड़ गए वामड्ढr मोहन के घर से गए माया मिली न राम।ड्ढr पच्चीस-तीस करोड़ में पाले लिए बदलड्ढr नेताजी ने काट ली नोटों की बाकी फसल।ड्ढr नरेन्द्र सिंह ‘नीहार’, नई दिल्ली

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