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बंद गली से बाहर निकला मसला

अमरनाथ जमीन विवाद के मसले के समाधान की कवायद कर जम्मू-कश्मीर से लौटा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल राज्य के दोनों क्षेत्रों के बीच मुद्दे पर पैदा हुई खाई को पाटने के लिए सोमवार को नई दिल्ली में एक रिपोर्ट तैयार करगा। यह रिपोर्ट बाद में प्रधानमंत्री को सौंपी जाएगी। हालांकि रविवार को यहां लौटने पर गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने साफ शब्दों में कहा कि मसले का समाधान चंद दिनों में निकालना संभव नहीं होगा। कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनका तात्कालिक समाधान संभव है लेकिन कुछ अन्य पर सहमति कायम करने में वक्त लग सकता है। सूृत्रों के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल की बैठक में मोटे तौर पर हाईकोर्ट के वर्ष 2005 के एक आदेश पर सहमति हो गई। यह आदेश एक तीर से दो शिकार करता है। मसलन दो माह के लिए जमीन का अधिकार और प्रबंधन श्राइन बोर्ड को सौंपता है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार का जमीन वापसी का आदेश अपने आप रद्द हो जाता है। सूत्रों के मुताबिक इस शांति फामरूले की घोषणा इसलिए नहीं हो पाई क्योंकि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को संदेह है कि अमरनाथ संघर्ष समिति और हुर्रियत नेताओं को यह मान्य होगा। हालांकि भाजपा को उम्मीद है कि संघर्ष समिति को मनाया जा सकता है। 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के प्रतिनिधि अरुण जेटली भी इस बात से सहमत नजर आए कि जम्मू संकट का समाधान बातचीत से ही किया जा सकता है। हालांकि उनकी यह शिकायत है कि केन्द्र ने बातचीत की पहल करने में खासा विलम्ब किया। इससे पहले जम्मू में गृहमंत्री ने घाटी के लोगों को आश्वस्त किया कि जम्मू या पंजाब में उनकी किसी तरह की कोई आर्थिक नाकेबंदी नहीं की है। उन्होंने कश्मीरी फल उत्पादकों और ट्रांसपोर्टरों से सोमवार के अपने ‘मुजफ्फराबाद चलो’ पर अमल न करने की अपील की। हालांकि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी श्रीनगर फलमंडी से सोमवार सुबह शुरू होने वाले इस कूच में शिरकत करगी।

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