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सचिन कचचा सपना टूटा, ऑस्ट्रेलिया कचचा इंतजार

क्रिकेट अनिश्चितता का ऐसा खेल है जिसमें कोई भी भविष्यवाणी करना खतरे से खाली नहीं होता। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर पर यह कहावत शत प्रतिशत लागू होती है। सचिन को वेस्ट इंडीज के ब्रायन लारा का 11,रन का विश्व रिकॉर्ड तोड़ने के लिए श्रीलंका के खिलाफ तीन टेस्टों की सीरीा में सिर्फ 172 रन की जरुरत थी और हर कोई मान रहा था कि सचिन यह मील का पत्थर आसानी से पार कर जाएंगे। लेकिन सचिन के भाग्य में शायद अपनी ही जमीन पर यह रिकॉर्ड तोड़ना लिखा था तभी वे सीरीज में अपनी छह पारियों में 15.83 के मामूली औसत से सिर्फ रन बना पाए और इस रिकॉर्ड को तोड़ने से 77 रन दूर रह गए। सचिन ने यह दौरा शुरू होने से पहले कहा था कि इस रिकॉर्ड को लेकर उन पर कोई दबाव नहीं है। लेकिन लगता है कि कहीं न कहीं वह इस रिकॉर्ड का मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस करते रहे जिससे लगातार उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ। मास्टर ब्लास्टर को अब यह रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अक्तूबर में होने वाली घरेलू टेस्ट सीरीा का इंतजार करना होगा। सचिन के अब 150 टेस्टों से 54.23 से औसत से 11,877 रन हैं। 35 वर्षीय सचिन ने इस दौरे में टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले एकमात्र अभ्यास मैच में 6रन बनाए थे। लेकिन उसके बाद छह पारियों में वह आश्चर्यजनक रूप से 27, 12, 5, 31, 6 और 14 रन ही बना सके। निर्णायक टेस्ट में जहां उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी, वहीं वह सिर्फ छह और 14 रन बनाकर भारत को मझधार में छोड़ गए। सचिन के लिए श्रीलंका का दौरा भाग्यशाली नहीं रहा। हालांकि उन्होंने टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले एकमात्र अभ्यास मैच में 6रन बनाए थे। लेकिन उसके बाद उनका बल्ला उनसे रुठा रहा। उससे पहले भी सचिन से उम्मीद की जा रही थी कि वह मार्च में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन टेस्टों की घरेलू सीरीा मे लारा का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। लेकिन वह चेन्नई मे ंपहले टेस्ट में शून्य पर आउट हो गए और फिर ग्रोइनचोट के कारण शेष दो टेस्टों से बाहर हो गए।

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