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बीसीईसीई की काउंसलिंग फिर दर्जनभर मुन्नाभाई धराए

बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा (बीसीईसीई) 2008 के अधीन डिप्लोमा सर्टिफिकेट प्रवेश प्रतियोगिता का परिणाम घोषित होने के बाद शनिवार को आईएएस भवन में हो रही काउंसिलिंग में एक बार फिर 13 नकली परीक्षार्थी पकड़े गये। पूछताछ के बाद सभी आरोपितों को एयरपोर्ट थाने की पुलिस के हवाले कर दिया गया। काउंसिलिंग के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने श्रवण कुमार (सुपौल), कुांबिहारी राय व प्रमोद कुमार (गया),संतोष व दिनेश कुमार (समस्तीपुर),प्रोविन्द्र कुमार व नीरा कुमार (नालन्दा), मुकेश कुमार (मधुबनी), संजय कुमार (औरंगाबाद), अरविन्द चौधरी व सुजीत सुमन (वैशाली), नितेश कुमार (भागलपुर) व प्रमोद कुमार (सहरसा) की उत्तर पुस्तिका (ओएमआर) के लिखावट से उनकी हैंडराइटिंग का मिलान किया तो उनकी जालसाजी पकड़ी गयी। बहरहाल एक माह में लगभग चार दर्जन फर्ाी परीक्षार्थियों की गिरफ्तारी ने पटना पुलिस को भी चौंका दिया है। जाहिर है इसके पीछे कहीं न कहीं कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। ड्ढr पीएमसीएच: स्पोर्ट्स मेडीसिन की बनेगी नोडल एजेंसीड्ढr पटना (हि.प्र.)। पीएमसीएच को स्पोर्ट्स मेडीसिन का नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। इस योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अंतिम रूप में है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ स्पोर्ट्स मेडीसिन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.फरासत हुसैन ने दूरभाष पर बताया कि दो माह में स्पोर्ट्स मेडीसिन का काम होने लगेगा। डा. हुसैन ने कहा कि स्पोर्ट्स मेडीसिन के तहत राज्य के सभी खेल एसोसिएशनों को आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न खेलों के कोच, खिलाड़ियों और रफरी को प्रशिक्षण दिया जाएगा। डा.आलोक मिश्रा बिहार एसोसिएशन ऑफ स्पोर्ट्स मेडीसिन के अध्यक्ष हैं। इसमें खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए आवश्यक जानकारी दी जाएगी साथ ही डोपिंग के बारे में भी बताया जाएगा। सामान्य खिलाड़ियों को यह जानकारी नहीं होती कि किसी सामान्य बीमारी की दवा लेने का उस पर क्या असर होता है।ड्ढr ड्ढr उन्होंने बताया कि 24 घंटे में कोई खिलाड़ी 20 कप कॉफी सेवन करेगा तो उसके शरीर में कॉफिन की मात्रा बढ़ जाएगी।ड्ढr खेल के अलावा उसे अन्य बातों की जानकारी इस प्रशिक्षण शिविर में दी जाएगी। बिहार में स्पोर्ट्स मेडीसिन के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। बिहार एसोसिएशन के सदस्य डा.अमूल्य कुमार सिंह का कहना है कि खिलाड़ियों को हल्की चोट भी उन्हें झकझोर कर रख देती है। पटना एक राष्ट्रीय खिलाड़ी इसका उदाहरण बना हुआ है। चोट के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक दबाव से उबरने में लम्बा समय गुजर जाता है। यहां के सिर्फ 20 फीसदी खिलाड़ी ही इस तकनीकी का लाभ उठा रहे हैं।

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  • Web Title: बीसीईसीई की काउंसलिंग फिर दर्जनभर मुन्नाभाई धराए