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लखीसराय में नरेगा सुपर फ्लॉप

सरकार की अन्य योजनाओं की तरह राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरगा) जिले में सुपर फ्लॉप साबित हुई है। गरीब एवं बेरोजगार लोगों को वर्ष में एक सौ दिन रोजगार देने के लिए ‘नरगा’ का सही लाभ अब तक नहीं मिल पा रहा है। ‘नरगा’ के बार में कहा जा रहा है कि यह बिचौलियों से प्रभावित योजना है तथा पंचायत प्रतिनिधियों के लिए उस जिले में ‘कामधेनु’ साबित हो रही है। योजना के तहत न तो मजदूरों को रोजगार मिल रहा है और न ही भविष्य में रोजगार मिलने की गारंटी ही दी जा रही है।ड्ढr ड्ढr किसी भी परिवार को 100 दिन का काम उपलब्ध नहीं कराया गया है। नतीजतन आज भी लखीसराय एवं आसपास के जिलों से रोजाना सैकड़ों की संख्या में मजदूरों का अन्यत्र पलायन बदस्तूर जारी है। इस महत्वपूर्ण योजना का तीसरा साल चल रहा है। लेकिन अभी तक यह सही ढंग से धरातल पर नहीं उतर पायी है। उसका सबसे बड़ा कारण ‘जॉब कार्ड’ का नहीं बन पाना है। सरकार की तमाम हिदायतों के बावजूद अब तक शत-प्रतिशत जॉबकार्ड नही बन पाए हैं। अभी तक इस जिले में 27 हजार 786 परिवारों को रोजगार मुहैया कराया गया है। वर्ष-2008-0में 555. 54 लाख रुपये इस योजना के लिए प्राप्त हुए हैं। अभी तक 715.24 लाख रुपये खर्च हुए। शेष 400 .43 लाख बचा है।ड्ढr पूर्व में 560.13 लाख पड़ा हुआ है। वित्तीय वर्ष में 17 लाख 23 हजार 28 हजार 00 कार्य दिवस सृजित किए गए। वित्तीय वर्ष 2007-08 में 78 हजार जॉब कार्ड बांटने के लक्ष्य के विरुद्ध 57 हजार कार्ड बांटे गए। लखीसराय जिले को दूसरी किस्त के आवंटन में सिर्फ इसलिए विलंब हुआ क्योंकि जिला प्रशासन द्वारा उपयोगिता प्रमाण-पत्र एवं अंकेक्षण रिपोर्ट समय पर ग्रामीण विकास मंत्रालय को नहीं भेजी जा सकी। सरकार ने रोगार के लिए जो कार्य योजनाएं तैयार की है उसमें भी कई खामियां हैं।

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