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सब कुछ ठीक नहीं है जेवीएम में भी

अन्य दलों की तरह झाविमो (प्र) के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं है। शुक्रवार को पदाधिकारियों की बैठक और शनिवार-रविवार को कार्यसमिति की बैठक में भी पार्टी के नेताओं का आपसी मतभेद-मनभेद छलक उठा। पार्टी के शीर्ष नेताओं-पदाधिकारियों के बीच उभर मतभेद पर पार्टी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने फिलहाल मौन रहना ही श्रेयष्कर समझा। विवाद की शुरुआत शुक्रवार की रात केके पोद्दार के आवास पर हुई पदाधिकारियों की बैठक से शुरू हुई। प्रवीण सिंह ने जसे ही रांची में क्रिकेट स्टेडियम बनाने के मुद्दे को कार्यसमिति में पेश किये जानेवाले राजनीतिक प्रस्ताव में शामिल करने की मांग की, विनोद शर्मा इसके विरोध में खड़े हो गये। कई अन्य नेता भी शर्मा के समर्थन में आ गये। इसके बाद स्टेडियम के विषय को किनार करते हुए राजनीतिक प्रस्ताव में यह जोड़ा गया है कि युवाओं को खेल कूद में प्रोत्साहन देने पर पार्टी जोर देगी। प्रवीण सिंह और दीपक प्रकाश ने बैठक में ही फिर इस बात को छेड़ दिया कि पार्टी की ओर से भेजे जानेवाले पत्र उन लोगों को नहीं मिलते। विनोद शर्मा फिर उनके इस आरोप के विरोध में खड़े हो गये। बाबूलाल मरांडी चुपचाप रहे। जब कार्यसमिति की बैठक शुरू हुई तो इसमें कई नेताओं ने शीर्ष स्तर पर तालमेल में भारी कमी को रखांकित किया। परोक्ष रूप में पार्टी उपाध्यक्ष डॉ सबा अहमद ने भी इस विषय को रखा। कुछ अन्य बड़े नेताओं ने भी नाराजगी जतायी। प्रदीप यादव को छात्र-युवा मोरचा के कार्यक्रमों का प्रभारी बनाये जाने का भी विरोध हुआ। विरोध तो केपी शर्मा को भी बुद्धिाीवी और शिक्षा प्रकोष्ठ का प्रभारी बनाये जाने पर भी हुआ लेकिन अधिकतर ने चुप्पी साध ली क्योंकि शर्मा के प्रोफेसर होने के कारण उनका सीधा विरोध करने में उन्हें ही परशानी होने लगी। कार्यसमिति की बैठक में रवींद्र राय भी खासे नाराज दिखे। पदाधिकारियों की बैठक में परिमल नाथवानी का मुद्दा उठते-उठते रह गया।

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