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राजरंग

मोबाइल पास , साहब दूरड्ढr जब से मोबाइल का जमाना आया है, साहेब लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। मोबाइल कब और कहां बज उठेगा, कोई नहीं जानता। बज गया और आपने नहीं रिसीव नहीं किया तो समझो वह कॉल मिस हो जायेगा। अब यह आप तय करं कि कॉल बैक करना है या नहीं। लेकिन अब तो हर कोई मोबाइल पर सीधा संपर्क साधना चाहता है। नंबर मिल गया तो जरूरी नहीं है कि साहेब बतिया ही लेंगे। सेलफोन घनघनाते ही साहब कहते हैं- अर भाई अभी हम बात नहीं कर सकते हैं, बाहर में हैं। अब यह बात समझ में नहीं आती है कि साहब भी वहीं पास रहें या दूर इससे क्या फर्क पड़ता है। बात तो उनके हाथ में रखे सेलफोन से ही हो रही है। यह स्थिति सरकार के मंत्रियों -विधायकों की भी है। फोन लगाइये तो मंत्री जी की आवाज आयेगी- हम बाहर हैं, बात नहीं हो सकती। अब साहेब बाहर हैं तो उनका मोबाइल भी उनके साथे-साथ बाहर है। मोबाइल तो घर छोड़कर आये नहीं। और आये होते तो यह कैसे कह पाते कि बाहर हैं, बात नहीं होगी। जमाना हाइटेक हुआ है तो आप भी हाइटेक हो जाइये श्रीमान।

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