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अब भी विद्यालयों के लिए एक लाख कमरों की जरूरत

बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में धीर-धीर नए स्कूल और कमर बन रहे हैं, लेकिन अभी भी मंजिल बहुत दूर है। कहीं आधे-अधूर भवन बने हैं, कहीं जमीन उपलब्ध नहीं है तो कहीं विवाद के कारण निर्माण का काम अटका हुआ है। बिहार में पहले जहां नब्बे बच्चों पर एक कमरा उपलब्ध था, वहीं अब लगभग 52 बच्चों पर एक कमरा उपलब्ध है, जबकि 40 बच्चों पर एक कमरा होना चाहिए। राज्य के स्कूलों में अब भी एक लाख कमरों की जरूरत है।ड्ढr ड्ढr नीतीश सरकार ने मुख्यमंत्री समग्र विद्यालय विकास कायर्क्रम को जिस सोच के साथ शुरू किया था, उसके धरातल पर उतरने में समय लगेगा। इस योजना के तहत स्कूलों के निर्माण के पहले चरण में स्कूलों, कमरों और चहारदीवारी, पेयजल , शौचालय, बिजली आदि की व्यवस्था शामिल है। इनके निर्माण का काम तेज हुआ और लगभग साठ हाार नए कमर बने हैं। नए तीस हाार कमर बनने की प्रक्रिया में हैं। साक्षरता के मामले में राज्य मुल्क का बाटॅम स्टेट है। राज्य में प्राथमिक और मध्य स्कूलों की संख्या 73 हाार है। इतने से काम नहीं चलने वाला है। इसमें छलांग लगाने के लिए एक विशेष अभियन चलाने की जरूरत है,अन्यथा साक्षरता के मामले में राष्ट्रीय औसत को छू पाना मुश्किल होगा।ड्ढr ड्ढr सरकार ने पंद्रह हाार नए स्कूल भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी है, लेकिन इनमें आधे के लिए जगह ही उपलब्ध नहीं हैं। सरकार को जमीन खरीदनी पड़ेगी या एक्वायर करना पड़ेगा। बिहार के स्कूलों का यह भी सच है कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में स्कूल अब भी पेड़ों की छांव में चलते हैं। शिक्षा विभाग की ताजा-तरीन रिपोर्ट के अनुसार लगभग साढ़े तीन हाार नए स्कूल बन पाए हैं। हालांकि इसमें 2388 नए स्कूल भवन 2006 तक ही बन गए थे। बाद में स्कूलों के निर्माण की गति धीमी पड़ गई और छह हाार से अधिक के लक्ष्य के मुकाबले बने सिर्फ 368 स्कूल।ड्ढr राज्य सरकार प्रति बच्चा वार्षिक 3800 रुपए खर्च करती है। यह राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। राज्य में स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या 1 करोड़ 80 लाख है। बच्चों की ड्राप आउट दर राज्य में अधिक है।ड्ढr ड्ढr मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने दावा किया है कि पिछले तीन वर्षो में जितने स्कूल बने उतने पहले कभी नहीं बने। उन्होंने कहा कि चार वर्ष पहले सिर्फ तीन-चार सौ करोड़ रुपए खर्च होते थे जबकि आज हम बिहार शिक्षा परियोजना के तहत 3400 करोड़ रुपए खर्च करने जा रहे हैं। सूबे के शैक्षणिक माहौल में एक गुणात्मक और कां्रतिकारी परिवर्तन आया है।ं

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