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गैस की कालाबाजारी: प्रशासन के अभियान ने दम तोड़ा

यों-यों दवा की मर्ज बढ़ता गया। घरलू गैस की किल्लत और कालाबाजारी से निजात दिलाने के लिए पिछले साल नवंबर में शुरू किया गया अभियान दम तोड़ चुका है। हालांकि बीच-बीच में दिखावे के लिए जिला प्रशासन की ओर से छोटे-मोटे होटलों और ढाबों के रसोइयों की जांच की जाती है। लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात। इन कार्रवाइयों से घरलू गैस के व्यावसासिक उपयोग पर न तो कोई असर पड़ना था और न हुआ।ड्ढr ड्ढr दूसरी ओर छोटे सिलेंडरों का अवैध धंधा आज भी जारी है। हर वैसे इलाके जहां छात्र और बैचलर रहते हैं, यह धंधा जोरों पर है। किरासन तेल की अनियमित आपूर्ति ने भी छोटे सिलेंडरों के धंधे को बढ़ाया है। इस धंधे को वैधानिक रूप देने के लिए सरकार ने छोटे सिलेंडरों को कनेक्शन देने की भी घोषणा की है। लेकिन अभी तक मात्र मात्र सात सौ लोगों के पास इसका कनेक्शन है। राजधानी में आज की तारीख में व्यावसायिक गैस कनेक्शन की संख्या करीब 750 है, जबकि एक अनुमान के अनुसार होटल, रस्तरां और ढाबों की संख्या इससे बहुत अधिक है। शादियों और पार्टियों में कैटरिंग करने वाले आज भी बिना किसी डर भय के घरलू गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल करते हैं। दूसरी ओर घरलू गैस के उपभोक्ता हैं, जिनकी संख्या करीब 4.5 लाख है। इन आम उपभोक्ताओं को राहत मिलती नहीं दिख रही है। उन्हें 21 दिन के अंतराल पर नंबर लगाकर सिलेंडर की आपूर्ति की जा रही है। छोटे परिवार वालों का काम फिर भी चल जा रहा है। लेकिन जिनका परिवार थोड़ा बड़ा है उनके सामने ब्लैक से सिलेंडर लेने के सिवाए कोई चारा नहीं है।ड्ढr ड्ढr जिला अनुभाजन ने व्यावसायिक उभोक्ताओं का सव्रे करने की घोषणा की थी। लेकिन आज भी इसका कोई आंकड़ा उनके पास उपलब्ध नहीं है। हालांकि वेंडरों ने वर्दी पहनना और ठेले पर तौल मशीन लेकर चलना शुरू कर दिया है। यह कवायद घरलू गैस की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए की गई थी। लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि ब्लैक का रट बढ़ गया।

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  • Web Title: गैस की कालाबाजारी: प्रशासन के अभियान ने दम तोड़ा