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मेडल नहीं निशाने पर ध्यान

हम ओलंपिक में क्यों चूक जाते हैं, इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने के लिए चश्मा पहने इस दरम्याने कद के युवक ने कुछ सूत्र बता दिए। उसने बता दिया कि यदि सच्ची लगन हो तो ओलंपिक गोल्ड असंभव नहीं।ड्ढr अभिनव ने कहा, ‘मेरा सारा ध्यान निशाना लगाने पर था। मैं कोशिश कर रहा था कि हर निशाना सही लगे। इतिहास बनाने या गोल्ड जीतने का कोई भी ख्याल मेर दिमाग में नहीं चल रहा था। बस एक ही लक्ष्य था-अच्छा निशाना लगाऊं और बेहतर करता चला जाऊं।’ड्ढr उन्होंने कहा ‘मुझे बेहद खुशी हो रही है। यह सब मेर शुभचिंतकों की चाह है। इसके लिए मैं अपने माता पिता, सभी कोच एवं शुभचिंतकों को धन्यवाद करता हूं।’ड्ढr बिंद्रा ने बताया, ‘मुकाबले में शुरुआत थोड़ी कमजोर रही थी पर भगवान का शुक्र है फाइनल में सब कुछ मेर पक्ष में होता चला गया। मुझे पूरी उम्मीद थी कि मैं यह कर सकता हूं। बस क्िलक करने की बात थी। जो आज कर गया।’ उन्होंने कहा कि मेर गोल्ड जीतने से निश्चित ही देश में खेलों की शक्ल बदलेगी। इससे लोग ओलंपिक खेलों पर अधिक ध्यान देने लगेंगे।ड्ढr

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