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असफलता का दर्द नहीं छुपा सके राचयवर्धन

भारतीय निशानेबाज लेफ्टिनेंट कर्नल रायवर्धन सिंह राठौर मंगलवार को अपनी असफलता का दर्द नहीं छुपा सके। उन्होंने यहां तक कह दिया कि वह अपने भविष्य को लेकर निश्चित नहीं हैं। चार साल पहले एथेंस आेलंपिक में डबल ट्रैप मुकाबले में रजत पदक जीतने के बाद देशवासियों की आंख का तारा बने रायवर्धन से इस बार भी काफी उम्मीदें थी, लेकिन वह फाइनल के लिए क्वालीफाई करने में असफल रहे। अपना दर्द छुपाते हुए रायवर्धन ने कहा कि कोई ठीक नहीं है कि वह फिर कभी मुकाबले में हिस्सा लें। अपनी असफलता से पूरी तरह दुखी भारतीय सेना के अधिकारी ने कहा कि उन्हें शूटिंग रेंज में फिर से लौटने के बारे में गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने मुकाबले में हार के बाद पत्रकारों से कहा कि मुझे अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए कुछ दिनों तक छुट्टी की जरूरत है। खेल का हिस्सा बने रहना मुझे अच्छा लगता है और इससे दूर रहना मेरे लिए काफी कठिन होगा। हालांकि मैं निशानेबाजी को अलविदा नहीं कह रहा हूं, लेकिन मुझे इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है कि क्या मैं फिर से मुकाबला कर सकूंगा। अपनी असफलता से आहत रायवर्धन अपना दर्द नहीं छिपा सके और अपने आंसू पोंछने के लिए दूसरे कमरे में चले गए। हालांकि वह कुछ देर बाद फिर से पत्रकारों से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि आपने सभी चीजों को चार साल की यात्रा के रूप में देखा है। कुछ व्यक्ितगत वजहों से एथेंस के बाद इसे जारी रख पाना आसान नहीं था, लेकिन मेरे कोच ने मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे मुकाबले के लिए तैयार होने के लिए प्रेरित किया। हालांकि उन्होंने व्यक्ितगत वजहों का जिक्र तो नहीं किया। लेकिन आज के प्रदर्शन के बारे में रायवर्धन ने इतना जरूर कहा कि उन्होंने अच्छे तरीके से निशाना साधा, लेकिन सही अंदाजा लगाने में चूक गए। रायवर्धन ने कहा कि पिछले दस दिनों से हम अंदाजा लगाने की कोशिश कर रहे थे और आज कुछ परेशानी हुई। यही वजह रही कि आज मैदान में काफी कम स्कोर कर पाया। हमने पहला शॉट लगाया तो निशाना वहां नहीं था जहां हम समझ रहे थे। यह उसी तरह था जैसे हम क्रिकेट मैच में गेंद को लपकने के लिए हाथ फैलाते हैं और थोड़ी हिचकिचाहट से गेंद छूट जाती है। उन्होंने कहा कि मैं पहले निशाने का अंदाजा लगाने में चूक गया। अपना स्कोर पूरा नहीं कर पाने से मैं काफी निराश हूं। इस साल मैं काफी ऊंचा शॉट नहीं लगा पाया था लेकिन यहां फाइनल में क्वालीफाई करने के वह पर्याप्त था। लेकिन अंत में मैं इसे हासिल नहीं कर सका जिसके लिए हम यहां आए थे। हालांकि अपनी व्यक्ितगत असफलता के बावजूद रायवर्धन एक बात से काफी संतुष्ट दिखे और अभिनव बिंद्रा की स्वर्णिम सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खैर इस बार हम अब तक कम से कम एक स्वर्ण पदक तो जीत चुके हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2004 में हुए एथेंस आेलंपिक में रजत पदक और उसके दो साल बाद मेलबोर्न राष्ट्रमंडल खेलों में सात तमगे जीतने वाले 38 वर्षीय राठौर क्वालीफाइंग राउंड में 150 में से 131 अंक हासिल करके 1प्रतियोगियों में 15वें स्थान पर रहे। यह प्रदर्शन उन्हें फाइनल में जगह नहीं दिला सका क्योंकि क्वालीफाइंग राउंड में शीर्ष छह स्थानों पर रहे प्रतियोगियों को फाइनल में जगह मिलनी थी।

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