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सरकारी बनाम पब्लिक स्कूल

एक्सपायरी डेटड्ढr ‘अब अंडों पर भी डलने लगी है एक्सपायरी डेट।’ भारत में अन्य क्षेत्रों में भी एक्सपायरी डेट होनी चाहिए। जसे लम्बे चलते हिन्दी धारावाहिकों की, प्रवासी दूल्हों के अरमानों की, नेताओं के कोर वायदों पर, दिल्ली के ऊपर मंडराते बादलों पर, ठरकी प्रौढ़ों (लोगों) के जज्जबातों पर, पुरानी दिल्ली के मकानों की, धूल से अटी सरकारी फाइलों की, सत्ता के गलियारों की, धर्मो के फरमानों की, लम्बी चलती सरकारों की, फिल्मों के किरदानों की, बेरोगारों की कतारों की। इन सभी पर भी एक्सपायरी डेट होनी चाहिए।ड्ढr राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली ख्याल अपना अपनाड्ढr सरकारी बंगलों पर अवैध कब्जों पर सरकार के रवैए से आजिज आकर सर्वोच्च अदालत की तीन जजों की पीठ ने कहा है कि सरकार का कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं है। लगता है कि यदि भगवान भी जमीन पर आ जाएं तो भी वह देश को नहीं बचा सकते। पर यह देश चल किस के सहारे रहा है? भगवान के सहारे ही। सरकार नाम की चीज तो कब की गायब हो गई। यह और बात है कि श्री भगवान भी आखिर तंग आकर कलर्को और भ्रष्ट नेताओं के इस देश को बाई-बाई कह दें और इसे अपने हाल पर हिचकोले खाने के लिए छोड़ दें।ड्ढr डॉ. आर. के. मल्होत्रा, नई दिल्ली अजन्मे का हकड्ढr इन दिनों हरश-निकिता मेहता और उनके अजन्मे शिशु को लेकर बहस चल रही है। चिकित्साविदों में से कुछेक ने यह संभावना व्यक्त की है कि वह जन्मना ब्लू-बेबी या फिर इतर जन्मजात हृदय विकारों से ग्रस्त पैदा हो सकता है। इसी आशंका से ग्रस्त एक मां बीस महीनों की गर्भावथा के पार भी गर्भपात कराने का कानूनी हक मांग रही है। वैसे ब्लू-बेबी सिनड्रोम से अपने आप भी बच्चे बाहर आए हैं, ताउम्र सामान्य रहे हैं। फिर कोई एम्स आगे आ सकता है इस होनहार की इमदाद को। इस अजन्मे का भी हक तो है।ड्ढr वीरन्द्र शर्मा, पंडारा रोड, नई दिल्लीं

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