DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

धीमा हुआ अर्थव्यवस्था का पहिया

ाुद प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह भले ही ढांचागत उद्योग क्षेत्रों की हालत सुधारने के लिए चिंतित हों लेकिन बीते जून माह के दौरान अकेले कोयला उद्योग को छोड़ अन्य सभी बुनियादी ढांचागत उद्योग क्षेत्रों की उत्पादन वृद्धि दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है और यह 5.2 फीसदी के मुकाबले 3.4 फीसदी पर सिमट गई है। यही नहीं, मई माह के मुकाबले भी जून माह में ढांचागत क्षेत्र की वृद्धि दर और भी कमजोर हो गई है। जहां तक चालू वित्त वर्ष के दौरान अप्रैल से जून माह के बीच ढांचागत क्षेत्र की विकास दर का सवाल है, वह भी 6.4 फीसदी के मुकाबले 3.5 फीसदी पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के दौर में घरेलू स्तर पर कच्चे तेल के उत्पादन की वृद्धि दर 4.7 फीसदी कम हो गई है। नतीजा साफ है तेल आयात बिल 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया है। पेट्रोलियम रिफाइनिंग उद्योग भी सुधार की राह से भटक गया है और इसकी विकास दरीसदी के मुकाबले 5.6 फीसदी के स्तर पर आ गई है। औद्योगिक उत्पादन और आम जन जीवन को संचालित करने वाले बिजली उद्योग की आलम यह है कि उसकी विकास दर 6.8 फीसदी के मुकाबले महा 2.6 फीसदी पर सिमट गई है। सरकार आपसी मतभेदों को भूल पाकिस्तान से सीमेंट आयात को सुविधाजन बना रही है लेकिन घरलू सीमेंट उद्योग की उत्पादन विकास दर 6 फीसदी से कम होकर 3.8 फीसदी पर आ गई है। उधर बढ़ती ब्याज दरों और उत्पादन लागत के चलते बीते जून माह के दौरान देश की औद्योगिक विकास दर महा 5.4 फीसदी पर सिमट गई है। अधिकांश औद्योगिक क्षेत्रों की उत्पादन वृद्धि दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है लेकिन शुक्र मनाइये उपभोक्ता उत्पाद उद्योग का जिसने मई माह के मुकाबले जून माह के दौरान औद्योगिक विकास दर को थोड़ा सुधारने में मदद की अलबत्ता, यह वृद्धि दर पिछले साल जून माह की वृद्धि दर 8.ीसदी के मुकाबले काफी है। जहां तक चालू वित्त वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल से जून माह के दौरान औद्योगिक विकास दर का सवाल है, यह लगभग आधे स्तर पर ही सिमट गई है। इस अवधि के दौरान औद्योगिक वृद्धि दर 10.3 फीसदी के मुकाबले 5.2 फीसदी पर रह गई है। विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को सुधारने के तमाम प्रयासों के बावजूद इसकी वृद्धि दरीसदी के मुकाबले 5.ीसदी पर ही रह गई है। इसी प्रकार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान भी मशीनरी उद्योग की वृद्धि दर 11.1 फीसदी के मुकाबले सिर्फ 5.6 फीसदी पर रह गई है। बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर 6.8 फीसदी से कम होकर 2.6 फीसदी पर सिमट गई है। जून माह के दौरान उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र की वृद्धि दर में 3.5 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है जबकि बीते साल के इसी माह के दौरान इसमें 3.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: धीमा हुआ अर्थव्यवस्था का पहिया