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लामी ने किया ‘सीमित सहयोग’ का वादा

गरीब और अमीर देशों के बीच विपरीत वैचारिक ध्रुवों के दलदल में फंसी डब्ल्यूटीओ वार्ताओं में हाल-फिलहाल टकराव समाप्त होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इन वार्ताओं को दलदल से निकालने के लिए भारत दौर पर आये डब्ल्यूटीओ महानिदेशक पास्कल लामी यहां प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के अलावा वाणिज्य मंत्री कमलनाथ और कॉरपोरट जगत से मुखातिब हुये। दोहा दौर की वार्ताओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत का मनाने के लिए पधार लामी को भारी दबावों के बीच कहना पड़ा कि वह इन वार्ताओं की प्रक्रिया में महा एक माध्यम है लेकिन अपनी सीमित क्षमताओं के तहत वह भारत जसे विकासशील देशों की मदद जरूर करंेगे। प्रधानमंत्री के साथ बैठक के दौरान लामी ने उन्हें विभिन्न घटनाक्रमों से अवगत कराते हुये वार्ताओं को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री डॉ.सिंह ने उन्हें विकासशील देशों की गहरी चिंताओं और आर्थिक विकास चुनौतियों से अवगत कराया है। उद्योग चैंबर फिक्की और सीआईआई के साथ बैठकों के दौरान भी डब्ल्यूटीओ महानिदेशक खास राजनयिक अंदाज पेश में आये और उन्होंने कहा कि दोहा दौर में विकासशील देशों के विशेष ध्यान के पहलू को खारिा नहीं किया जा सकता है। यही नहीं, अगर भारत की मांग के मुताबिक कृषि संरक्षण उपायों को हटाने की बात कोई भी देश करता है तो इसका सीधा मतलब दोहा वार्ताओं के बुनियादी अनिवार्य एजेंडे को खारिा करना ही माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह अगले सप्ताह अमेरिका यात्रा के दौरान भारत की चिंताओं को वहां के प्रशासन के समक्ष रखेंगे और अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देते समय कमलनाथ की राय को जरूर शामिल करेंगे। लामी के मुताबिक अभी भी वार्ताओं के सफल होने की पूरी गुजायंश बची हुई है लेकिन डब्ल्यूटीओ में सब कुछ पर सहमति से पहले यही माना जाता है कि अभी किसी भी मसले पर सहमति नहीं है। ध्यान रहें कि पिछले दिनों जिनेवा वार्ता के दौरान कुल 20 मसलों में 17 पर ही सहमति बनी है। लामी के भारत दौर का लाभ उठाते हुये वाणिज्य मंत्री कमलनाथ ने डिप्लोमैटिक अंदाज में उनकी तारीफ करते हुये विकसित देशों के रवैये पर निशाना साधा।

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