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जितेन्द्र और अखिल के मुक्के पड़े भारी

मुक्केबाजी में खुशी की खबर का दौर जारी है। 51 किलो फ्लाईवेट में जितेंद्र कुमार ने तुर्की के फुरकान उलास मेमीज को 12-3 से हराकर प्रीक्वार्टर फाइनल में जगह पा ली है। वहीं अखिल ने फ्रांस के अली हलाब को 54 किलो में 12-5 से हराकर प्रीक्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया। विजेंदर ने सोमवार को पहले ही प्रीक्वार्टर फाइनल में जगह बना ली थी। एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक पाने वाले जितेंद्र ने अपने ओलंपिक करियर की शुरुआत धमाके के साथ की। उन्होंने मेमीज पर सीधे मुक्के बरसाने शुरू किए और तीन राउंड से पहले ही अपने प्रतिद्वंद्वी को हरा दिया। अखिल का मुकाबला अब 2007 के विश्व चैंपियन सरगे वोदोपीयानोव से होगा। अखिल ने मुकाबले में शुरू से अंत तक पकड़ बना कर रखी। पहले दौर में उन्होंने 4-2 से बढ़त ले ली थी। उन्होंने कहा- मैं आगे भी अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगा। हरियाणा के 20 वर्षीय मुक्केबाज जितेन्द्र ने मुकाबले के दौरान रिंग पर दबदबा बनाए रखा और प्रतिद्वंदी को तीसरे राउंड में मुकाबले से बाहर करके ही दम लिया। फुरकान ने जब रिंग छोड़ा उस वक्त जितेन्द्र उनसे तीन के मुकाबले 12 अंकों से आगे थे। जितेन्द्र ने लगातार आक्रमण करने की रणनीति अपनायी और प्रतिद्वंद्वी को मौका नहीं दिया। फुरकान भारतीय मुक्केबाज का तोड़ नहीं ढूंढ़ सके। तुर्की के 17 वर्षीय मुक्केबाज ने पहले राउंड में बचाव की कोशिश की लेकिन जितेन्द्र ने उन पर मुक्कों की बारिश कर डाली। जितेन्द्र ने फुटवर्क का बेहतरीन इस्तेमाल किया और बेहद फुर्ती से मूव बनाकर सटीक पंच के जरिए अंक हासिल किए। जितेंद्र के ताकतवर मुक्कों से फुरकान की हिम्मत जवाब दे गयी। अंत में उनके कोच ने फुरकान को जितेन्द्र से मुकाबला करने के बजाय उनसे मैदान छोड़ने के लिए कहना ही बेहतर समझा। कोच जी. एस. संधू ने कहा, ‘जितेन्द्र ने प्रतिद्वंद्वी की रणनीति को पहले ही भांप लिया था। अच्छा मुक्केबाज होने के बावजूद फुरकान हमारी रणनीति से पार नहीं पा सके। तुर्क खेमा यह सोच रहा था कि भारतीय मुक्केबाज फुटवर्क का इस्तेमाल करने के बजाय अपनी जगह पर खड़े होकर मुकाबला लड़ते हैं मगर यह एक गलतफहमी साबित हुई।’ उन्होंने कहा, ‘फुरकान भारतीय मुक्केबाज की तेजी, फुर्ती और कदमों के इस्तेमाल की रणनीति से भौचक रह गए थे।’ जीत के बाद जितेंद्र ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास था कि आज मैं अपने प्रतिद्वंद्वी को हरा दूंगा। मैं उसके खिलाफ पहली बार उतरा था। हम दोनों का एक ही कद है और मैं काउंटर अटैक करने बेहतर हूं। यही कारण था कि मैंने आक्रमण शुरू कर दिया। यह अंक बटोरने के लिए जरूरी था। हम बाक्सरों को देश के लिए मेडल लाना है। इसीलिए मैं मुकाबले से पहलेअपने सीनियर अखिल से बात करता हूं। अगले मुकाबले के लिए भी मैं उनसे बात करूंगा।

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