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कार्यक्रम में भाग नहीं लेने वाले डाक्टर नपेंगे?3द्वद्यज्ठ्ठड्डद्वद्गह्यश्चड्डष्द्ग श्चrद्गथ्न्3 = o ठ्ठह्य = ह्वrठ्ठज्ह्यष्द्धद्गद्वड्डह्य-द्वन्ष्roह्यoथ्ह्ल-ष्oद्वज्oथ्थ्न्ष्द्गज्oथ्थ्न्ष्द्ग

राज्य सरकार उन पशु चिकित्सकों पर कठोर कार्रवाई करगी जो विभाग द्वारासंचालित ‘पशुपालकों के द्वार पशुचिकित्सक’ कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। उधर पशु चिकित्सकों के एक धड़े ने भी सरकार का समर्थन कर दिया है। हालांकि इस खेमे ने कुछ शर्ते भी रखी हैं। विभाग के निदेशक डा. एन सरवन कुमार ने कहा कि सरकार अपने निर्णय पर कायम है। निर्धारित अवधि में शिविरों का आयोजन हर हाल में होगा और पशुचिकित्सकों को उस सरकारी कार्यक्रम में भाग लेना होगा। जो डाक्टर इस कार्यक्रम का विरोध करंगे उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी। उस अवधि में अस्पताल बंद नहीं होंगे और सप्ताह में दो दिन डाक्टर पशु अस्पतालों में बैठेंगे।ड्ढr ड्ढr शेष दिनों में शिविरों में पशुओं का इलाज करंगे। उधर युवा पशु चिकित्सा स्नातक संघ ने इस सरकारी कायर्क्रम की सराहना करते हुए सरकार को कुछ सुझाव भी दिये हैं। इस संघ के कायर्कारी अध्यक्ष डा. जितेन्द्र प्रसाद, उपाध्यक्ष डा. रांीत कुमार शर्मा और संयुक्त सचिव डा. राजनारायण ने सरकार से कहा है कि इस कार्यक्रम को 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक चार की जागह सप्ताह में दो दिन चलाया जाये, शिविर में डाक्टरों को ले जाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। संघ ने इसके अलावा भी कई सुझाव सरकार को दिये हैं। सोमवार को डाक्टरों के एक अन्य संगठन बिहार पशु चिकित्सा संघ ने सरकार के इस निर्णय का विरोध किया था और डाक्टरों से शिविरों के बहिष्कार की अपील की थी। संघ के अध्यक्ष डा. विरश प्रसाद सिंह एवं महामंत्री डा. धर्मेन्द्र सिंह ने कहा था कि सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश पशुपालकों के हित में भी नहीं है।ं

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