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एनएचएआई के अफसरों ने केन्द्र पर फोड़चा ठीकरा

ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण के लिए पथ निर्माण मंत्री डा. प्रम कुमार दिल्ली जाएंगे। एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों (प्रोजेक्ट डायरक्टर) ने निर्माण में आ रही बाधा का सारा ठीकरा अपने केन्द्नीय अधिकारियों पर फोड़ दिया है। गुरुवार को पथ निर्माण मंत्री के कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक में केन्द्रीय एजेंसी राष्ट्रीय राजमार्ग विकास प्राधिकार (एनएचएआई) के अधिकारियों ने बताया कि काम धीमी होने के कारणों समेत सारी जानकारी वे समय-समय पर ऊपर पहुंचाते रहे हैं। ऐसी स्थिति में मंत्री डा. कुमार ने तय किया कि वे मतगणना के बाद दिल्ली जाकर एनएचएआई के चेयरमैन से मिलकर वस्तुस्थिति की जानकारी लेंगे।ड्ढr ड्ढr उनसे पूछेंगे कि समय पर सड़क निर्माण नहीं होने पर निर्माण एजेंसियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? मॉनीटरिंग क्यों नहीं हुई? काम धीमा होने पर पेनाल्टी क्यों नहीं लगाया गया? डा. कुमार ने कहा कि केन्द्र में नई सरकार बनने के बाद वे पूर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करंगे। सड़कों को टाइम बांड पूरा करने का लक्ष्य तय करने को कहेंगे। उन्होंने कहा कि समीक्षा के बाद ऐसा लग रहा है कि एनएचएआई और निर्माण एजेंसियों ने मिलकर जानबूझ कर काम में देरी की ताकि बिहार का विकास बाधित हो। बिहार बदनाम हो। इसकी जांच जरुरी है। काम धीमे होने का असर यह है कि बथनाकुटी से देवापुर तक फिर से टेंडर कराने की नौबत आ गई है। अन्य पैकेजों में काम बहुत धीमा है। विश्व बैंक के सहयोग से 4 और एनएचएआई संपोषित फंड से पैकेजों का काम चल रहा है। केन्द्र सरकार से आग्रह किया जाएगा कि विश्व बैंक की आपत्ति के बाद उसका काम भी केन्द्र सरकार अपने फंड से कराये। बैठक में एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरक्टर एके वर्मा, विजय शंकर, ए कुमार और एसएस झा के साथ ही कई आला अधिकारी उपस्थित थे। ड्ढr हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू,आज भी होगीड्ढr पटना (वि.सं.)। 48वीं से 52वीं बीपीएससी प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा रद्द करने के मामले में पटना हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हो गयी। मामले पर शुक्रवार को भी सुनवाई होगी। गुरुवार को न्यायमूर्ति सुधीर कुमार कटरियार तथा न्यायमूर्ति किशोर कुमार मंडल की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की। आयोग की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही ने अदालत को बताया कि चंद परीक्षार्थियों के कारण हजारों पीटी परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि राज्य के अधिकांश प्रखंडों में बीडीओ है तो सीओ नहीं। दोनों पदों पर एक ही व्यक्ित कार्य कर रहे हैं।ड्ढr ड्ढr प्रश्न पत्रों में दिए गए निर्देशों को उम्मीदवार ठीक से पढ़े नहीं तथा रिजल्ट निकलने के बाद असफल होने पर मुकदमा दायर कर दिए। उनका कहना था कि 1उम्मीदवारों को पीटी परीक्षा में सफल घोषित किया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी परीक्षार्थी परीक्षा के दौरान त्रुटिपूर्ण प्रश्न-पत्र या किसी अन्य प्रकार के गड़बड़ी की शिकायत किसी से नहीं की। जब पीटी परीक्षा में असफल हो गए तो उन्हें परीक्षा में गलती नजर आने लगी। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा को रद्द कर नए सिर से परीक्षा कराने के एकल पीठ के आदेश को गलत बताया। गुरुवार को उनकी बहस अधूरी रही। शुक्रवार को आगे की बहस करंेगे।

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