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हाल-ए-कश्मीर का यह भी एक चेहरा

ाम्मू-कश्मीर में इन दिनों हालात इस कदर साम्प्रदायिक हो गए हैं कि यह वाकया नजर में नहीं चढ़ सका। हुआ यूं कि श्रीनगर में मीरवाक्ष मंजिल के बाहर एक बंकर में तैनात करीब दर्जनभर सीआरपीएफ के जवानों की मंगलवार रात जान तक चली जाती अगर मीरवाक्ष उमर फारूक और उनके लोगों ने उन्हें हिंसक भीड़ के कोप से न बचाया होता। मीरवाक्ष की अगुआई वाली अवामी एक्शन कमेटी के मुख्यालय के सामने से हाारों लोगों की उग्र भीड़ हुर्रियत नेता शेख अब्दुल अजीज की मिट्टी को दफनाने के बाद गुजर रही थी। जाहिर है कि मीरवाक्ष मंजिल के बाहर स्थित यह बंकर इस भीड़ का निशाना बन गया होता। लेकिन ज्योंही भीड़ मंजिल के करीब पहुंची, मीरवाक्ष और उनके लोग सीआरपीएफ के सभी जवानों को इमारत के अंदर ले गए और उन्हें वहां से जनाजे का जुलूस गुजर जाने तक छिपाए रखा। बाद में मीरवाक्ष ने श्रीनगर से फोन पर इस अखबार से कहा, ‘हम किसी को लहू-लुहान नहीं करना चाहते।’ गौरतलब है कि शेख अब्दुल अजीज को ईदगाह में शहीदों की उस कब्रगाह में दफनाया गया जहां खुद मीरवाक्ष के पिता मौलवी मोहम्मद मीरवाक्ष फारूक को दफन किया गया था। इससे पहले ईदगाह में हुर्रियत के मध्यमार्गी नेता मीरवाक्ष और कट्टरपंथी सैयद अलीशाह जिलानी दोनों ने ही लोगों से अपील की थी कि वे सुरक्षा बलों को निशाना न बनाएं।

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