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मैदान में उतर आई घाटी की तपिश

अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन सौंपने के मुद्दे पर पिछले 47 दिनों से सुलग रही घाटी बुधवार को कुछ शांत रही। हां, कश्मीर में दो जिलों में कफ्यरू में ढील के दौरान हिंसा की कुछ घटनाएं जरूर हुईं। इस बीच, पिछले दिनों पुलिस फायरिंग की घटनाओं में घायल पांच लोगों ने दम तोड़ दिया। जम्मू और कश्मीर के कई इलाकों में ‘शूट एट साइट’ के ऑर्डर के चलते भी हिंसा कुछ हद तक काबू में आई है। शांति बहाली के प्रयासों के बीच गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ताजा हालात की जानकारी दी। हालांकि कश्मीर घाटी में आंदोलनकारियों ने मुजफ्फराबाद जाने की जिद अभी तक छोड़ी नहीं है। बुधवार को भी हाारों प्रदर्शनकारी कमालकोट तक जा पहुंचे। यहां से नियंत्रण रखा सिर्फ 10 किलोमीटर दूर है। इधर जम्मू में हालात सामान्य तो हो रहे हैं, पर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा है। देशभर में चक्का जाम : अमरनाथ बोर्ड से जमीन वापस लेने के विरोध में बुधवार को देशभर में प्रदर्शन और चक्का जाम हुआ। दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश में स्थिति ज्यादा ही खराब रही। विश्व हिन्दू परिषद और अन्य हिन्दू संगठनों के बैनर तले तमाम जगह प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने कई राजमार्गो को निशाना बनाया और जाम लगा दिया। इससे हाारों लोग घंटों जाम में फंसे रहे। उत्तर प्रदेश में तकरीबन सात सौ स्थानों पर चक्का जाम हुआ और 34 जगहों पर ट्रेनें रोकी गईं। औरंगाबाद में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को जाम कर दिया। सासाराम में भी हिन्दू संगठनों ने जीटी रोड पर जाम लगाया। दिल्ली में दर्जनों जगह मार्ग अवरुद्ध हुए। जाम की वजह से लोग बसों और ट्रेनों से उतर कर पैदल ही चल दिए।ं

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