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19 जनवरी, 2020|7:25|IST

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पहलवान भी जा रहे हैं पदक की उम्मीद के साथ

भारत के तीन पहलवान बीजिंग ओलंपिक में ताल ठोकने के लिए बुलंद हौसले के साथ बुधवार की रात रवाना हो गए। 120 किलो में गुरु हनुमान के शिष्य राजीव तोमर से भारतीय कुश्ती फेडरशन को पदक की उम्मीद नहीं है। फेडरशन के अध्यक्ष जी एस मंडेर का कहना है कि, 120 किलो में दुनिया के काफी तगड़े पहलवान हैं, ऐसे में मुकाबला बहुत कठिन होगा। अगर राजीव पहले दस पहलवानों में भी आ जाए तो बड़ी बात होगी। इसके जवाब में गुरु हनुमान अखाड़े के कोच द्रोणाचार्य महासिंह राव ने कहा, जब फेडरशन के अध्यक्ष ऐसा कह रहे हैं तभी तो हमारा पहलवान पदक जीतने के लिए और मजबूत इरादे के साथ मुकाबले में उतरगा। लेकिन राजीव तोमर भी मान रहे हैं कि उनके लिए राह आसान नहीं है। स्विट्जरलैंड में ओलंपिक क्वालीफाइंग राउंड में दुनिया के जाने माने पहलवानों को पराजित कर रजत पदक जीतने वाले तोमर ने कहा - मेरे लिए मुकाबला मुश्किल रहेगा। हालांकि मुझे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर नहीं मिल पाया था। लेकिन मैं संघर्ष करूंगा और पदक जीतने की पूरी कोशिश करुंगा। ओलंपिक में फ्रीस्टाइल कुश्ती के मुकाबले 1अगस्त से शुरू होंगे। बीजिंग में क्या होगा? 1े हेलसिंकी ओलंपिक में पहलवान खशाबा जाधव के कांस्य पदक जीतने के बाद अब कौन पदक जीतेगा? इसका जवाब कोई नहीं दे सकता। अभी तक बात केवल दावों तक ही सीमित है। कुश्ती के जानकार हल्के वजन वर्गो 60 और 66 किलो में योगश्वर दत्त और सुशील से उम्मीद जता रहे हैं। फेडरशन के सचिव और कुश्ती टीम के मैनेजर करतार सिंह ने घिसे पिटे अंदाज में कहा, बहुत कुछ ड्रॉ पर निर्भर करेगा। यदि पहलवानों को शुरुआत में बाई मिलती है तो आगे का काम आसान हो सकता है। महाबली सतपाल के शिष्य सुशील से ओलंपिक में काफी उम्मीद लगाई हैं। सुशील दोहा एशियाड के स्वर्ण पदक विजेता कोरियाई पहलवाल को हरा चुके हैं। उन्होंने इस वर्ष मार्च में द. कोरिया में एशियाई कुश्ती प्रतियोगिता में 66 किग्रा. वर्ग में रजत पदक जीता था। योगेश्वर भी 1े एशियाई खेलों के स्वर्ण विजेता सतपाल के शिष्य हैं। योगेश्वर ने एशियाई कुश्ती में 60 किग्रा. वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।ं

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  • Web Title: पहलवान भी जा रहे हैं पदक की उम्मीद के साथ