DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

ट्रनों की एसी बोगियों में बिना धुलवाए बेडरोल की सप्लाई हो रही है। एक बार इस्तेमाल के बाद बिना धुलाई के ही दुबारा पैकिंग कर दी जाती है। गरीब रथ के बेडरोल दिल्ली व कोलकाता में धुलाई के बदले बहाुदरपुर में ही आयरन किए जाते हैं। रलवे की लाख चौकसी के बाद भी यह धंधा बंद नहीं हो रहा है। लाखों का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। हालांकि यह खेल सिर्फ गरीब रथ में ही नहीं चलता है। अक्सर ट्रेनों में गंदे व सिकुड़े चादर मिलने की शिकायतें यात्रियों द्वारा की जाती हैं। बारिश के मौसम में ऐसी शिकायतें और बढ़ जाती हैं। इस संबंध में दानापुर मंडल के डीआरएम बीडी गर्ग ने कहा कि पिछले एक माह से धुलाई वाले स्थान पर ही चादरों की जांच की जा रही है। गंदे चादरों को वहीं पर बाहर निकाल दिया जाता है।ड्ढr ड्ढr वे बताते हैं कि लगातार हो रही जांच से इस तरह की शिकायतें मिलनी बंद हो गई हैं। दानापुर मंडल से खुलने वाली विभिन्न ट्रेनों में लगभग दस हाार चादर प्रतिदिन इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनकी धुलाई कराने की जिम्मेदारी भी इस मंडल को है। इनमें सिर्फ राजेंद्रनगर टर्मिनल से 7000 से अधिक चादर ट्रेनों में चढ़ाई जाती हैं, बेडरोल की धुलाई ठेके पर कराई जाती है। रलवे सूत्रों के अनुसार एक चादर की धुलाई पर 2.75 रुपये व तकिए की खोल पर 1.35 रुपये रलवे खर्च करती है।ड्ढr ड्ढr गरीबरथ के बेडरोल की धुलाई का जिम्मा दानापुर मंडल को नहीं है। इस्तेमाल किए गए चादरों को बिना धुलवाए पैंकिग करने के लिए बहादुरपुर में करीब 500 से 600 चादर गरीब रथ के दिन आयरन कराए जाते हैं। गरीब रथ में बेडरोल के लिए यात्रियोंे को 25 रुपये देने होते हैं। इस कारण गरीब रथ के कर्मचारी पटना में एसी फुल कर देते हैं और आगे जाकर इसे धीमा कर देते हैं। ताकि यात्री बेडरोल लें जरूर पर इसका इस्तेमाल कम से कम करं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: