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वसूले गए लेवी चावल का नहीं मिल रहा हिसाब

चावल की सरकारी खरीद का अभियान समाप्त होने को है लेकिन जिलों में वसूले गये लेवी चावल का हिसाब नहीं मिल पाया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने तमाम जिलों से एक सप्ताह के भीतर उनके यहां कार्यरत मिलों के कारोबार का पूरा रिकॉर्ड मांगा है। लेवी देने में गड़बड़ी करने वाले मालिकों की मिल का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य की चावल मिलों से न्यूनतम 40 हजार टन लेवी वसूली का लक्ष्य था जबकि बिहार में पहली बार लगभग 50 हजार टन लेवी की वसूली हुई। फिर भी इसे असंतोषजनक माना जा रहा है। दरअसल राज्य में 6,टन धान की खरीद हुई है। इस हिसाब से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को लगभग डेढ़ लाख टन लेवी मिलनी चाहिए थी। विभाग ने पहले भी चार बार जिलों से इस संबंध में जानकारी मांगी थी। उनके रवैये पर नाराजगी जताते हुए विभाग ने एक बार फिर सभी डीएम से चावल मिलों के कारोबार की जानकारी मांगी है ताकि यह पता चल सके कि किस मिल पर कितनी लेवी बकाया है।

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