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वेतन बढ़ने से कंपनियों में जगीं बेहतरी की उम्मीदें

छठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से लाखों लोगों की जेबों में पैसे की उपलब्धता जरूर बढ़ेगी लेकिन इससे कॉरपोरट जगत और खासकर उपभोक्ता उद्योग को अपनी बेहतरी की संभावनायें दिखने लगी हैं। महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी के दौर में पिछले कुछ महीनों से लगातार आ रही औद्योगिक गिरावट को संभालने में खासी मदद मिलना तय हो गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे सर्वाधिक लाभ विभिन्न उपभोक्ता उद्योगों, ऑटो और आईटी क्षेत्र को होगा। वेतन बढ़ने से आम बजट के तहत 15,700 करोड़ रुपये और रल बजट के तहत 6400 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। महंगाई को थामने के लिए रिार्व बैंक पिछले कई महीनों से सख्त मौद्रिक नीति लागू कर रहा है। सामान्य रूप से रिार्व बैंक के नकद आरक्षित अनुपात में 0.5 फीसदी की कमी करने से बाजार से 18000 करोड़ रुपये कम होते हैं। लेकिन वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से लगभग 22000 करोड़ रुपये आम लोगों के हाथों में होंगे। यह पैसा औद्योगिक निवेश में नहीं बल्कि जीवन के उन्नयन में जाएगा। यानी कि ऑटो, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सामान और अन्य उत्पादों और कंप्यूटर (लैपटॉप आदि) की खरीद में पैसा अधिक खर्च होगा।उद्योग सूत्रों के मुताबिक वेतन आयोग की सिफारिशोंे से औद्योगिक वृद्धि दर को संभालन में काफी मदद मिलेगी। फिलहाल इसमें भारी गिरावट का दौर है और यह 5.2 फीसदी पर आ गई है। महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी की दोहरी मार ने उपभोक्ता खर्च को घटा दिया है। उद्योग चैंबर एसोचैम के महासिचव डी.सी.रावत के मुताबिक इससे आद्योगिक चृद्धि पर सकारात्मक असर पड़ेगा और उपभोक्ता उद्योग को खास लाभ होगा। फिक्की महासचिव डॉ.अमित मित्रा के मुताबिक इससे सरकारी क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता के मानव श्रम को बनाये रखने और गवर्नेस सुधारने में मदद मिलेगी। सियाम के महानिदेश डी.चिनॉय के मुताबिक वेतन बढ़ने और बैंकिंग क्षेत्र की ओर से ऑटो लोन को प्रोत्साहित करने का सकारात्मक असर पूर उद्योग पर पड़ना तय है।ं

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